Top 100 Love Shayari in Hindi 

 

तेरे इश्क की जंग में हम मुस्कुराके डट गए... 

​तलवार से तो बच गए पर तेरी मुस्कान से कट गए!

 

love shayari

 

आसान नही‬ है ‪हमसे‬ यूँ ‪शायरियों‬ में ‪जीत पाना‬,

हम हर ‪एक शब्द‬ मोहब्बत‬ में ‪हार कर‬ लिखते‬ हैं!

 

तुम लाख दुआ करलो...

मुझसे दूर जाने की… 

मेरी दुआ भी उसी खुदा से है...

तुझे करीब लाने की! 

 

इश्क के चाँद को...

अपनी पनाहों में रहने दो!

लबों को न खोलो... 

आँखों को कुछ कहने दो! 

 

Top 100 Love Shayari in Hindi2

 

आज कुछ कमी है तेरे बगैर,

ना रंग ना रोशनी है तेरे बगैर,

वक़्त अपनी रफ्तार से चल रहा है,

बस धडकन मेरी थमी है तेरे बगैर!

 

दिल में उसकी चाहत और... 

लबों पे उसका नाम है...

वो वफ़ा करे ना करे...

जिंदगी अब उसी के नाम!

 

जब कभी तुम... हमे याद कर के मुस्कराओ,

हम समझ लेंगे... हमारी 'दुआ'...

कबूल हो गयी! 

 

top 100 love shayari in hindi2

 

मिला था कुदरत से एक ही दिल, 

जो...तुझे दे दिया, अगर 

हजारों मिलते तो भी...

तुझ पे ही कुर्बान कर देता!

 

तेरी कलाई जो पकडूँ तो... बहुत शोर मचाती हैं,

ये चूडियाँ आखिर तेरी लगती क्या हैं...? 

 

"तेरा" हुआ ज़िक्र तो "हम" तेरे 'सजदे में झुक' गये...

अब क्या 'फर्क' पड़ता है... 

"मंदिर" में 'झुक' गये या "मस्जिद" में 'झुक' गयेl 

 

सुनो लोग कह रहे है, नज़र आने लगी हो तुम,

मेरे लहजे और अल्फ़ाज़ों में...

मैं दर्द की जगह मोहब्बत लिखने लगा हूँ,

न जाने तुम्हारी किस इबादत का असर है!

 

शबनमी चांदनी रातों में जो चांद से टपके वो है इश्क...
इक तेरी याद में मेरी आंखो से जो बहे वो है इश्क! 
 

जिसके 'हिस्से' में "रात" है...

यकीनन "चाँद" भी 'उसके' "हिस्से" में होगा!

 

न कोई किसी से दूर होता है,
न कोई किसी के करीब होता हैl 

 

प्यार खुद चल कर आता है,
जब कोई किसी का नसीब होता हैl  

 

कैसे 'मान' लूँ...

यहाँ हर "मन्नत" 'पूरी' होती है... 

मैंने तो हर "मन्दिर मस्जिद" में... 

"तूझको" 'मांगा' था! 

 

कोई शायर तो कोई फकीर बन जाये,
आपको जो देखे वो खुद तस्वीर बन जाये,
ना फूलों की ज़रूरत ना कलियों की...
जहाँ आप पैर रख दो वहीं कश्मीर बन जायेl 

 

बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें,
आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हेंl 

 

ख़ुदकुशी जुर्म भी है, सब्र की तौहीन भी है,
इसलिए इश्क़ में मर-मर के जिया जाता हैl 

 

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी हैl 

 

सुना है वो दुःख में होता है तो ...
मुझे याद बहुत करता है,
अब में उस के लिए ...
ख़ुशी की दुआ करू या गम के लिएl 

 

लाल चूड़ियाँ तेरे हाथ मे लगती है ऐसे ...
जैसे चाँद पर रख दिया हो किसी ने कुछ फूल गुलाब केl 

 

एक बार उसने कहा था मेरे सिवा किसी से प्यार ना करना,
बस फिर क्या था तब से मोहब्बत की नजर से...
हमने खुद को भी नहीं देखा! 

 

कौन कहता है कि आपकी तस्वीर बात नहीं करती...
हर सवाल का जवाब देती है बस आवाज़ नहीं करतीl 

 

उसने कहा दिखाओ अपनी हथेली,
मैं किस लकीर में हूँ, मैंने कहा...
छोटी सी लकीर में नहीं,
तुम मेरी हर धड़कन में होl 

 

मांगने को तो बहुत कुछ मांग लूँ तुम से,
क्या दोगे अगर मै तुमसे तुम ही को माँग लूँ l

 

तुम्हारी एक मुस्कान से सुधर जाती है तबियत मेरी...
बताओ यार इश्क करती हो या इलाज करती होl 

 

ये दिल न जाने क्या कर बैठा,
मुझसे बिना पूछे ही फैसला कर बैठा,
इस ज़मीन पर टूटा सितारा भी नहीं गिरता,
और ये पागल चाँद से मोहब्बत कर बैठाl 

 

जब भी उसके नाज़ुक बदन को छूता हूं,
समंदर की लहरों सा महसूस करता हूं,
छुई मुई सी है मानो वह मेरी जानम,
एक छुवन से उसके मुरझाने से डरता हूंl 

 

ज़िद तो मोतियों की होती है बिखर जाने की,
हम तो धागा हैं तुमको पिरो के रखेंगे अपनी मोहब्बत मेंl 

 

उन्होंने ने कहा तुम्हारी आँखें बहुत खूबसूरत है,
हमने भी कह दिया आपके ख्वाब जो देखती हैंl 

 

जिसकी सज़ा सिर्फ तुम हो,
मुझे ऐसा कोई गुनाह करना हैl 

 

हर रात को तुम इतना याद आती हो कि हम भूल जाते हैं, 
ये रातें सपनों के लिए होती है, या 
तुम्हारी यादों के लिए।  

 

मोहब्बत सिर्फ लफ्जो से बयां नहीं होती,
अदाओ में भी कुछ राज छूपे होते है!
इजहारे मोहब्बत के सवालो में ही खतम हो गए रिश्ते,
आप कोई जवाब देते तो शायद संवर जाते हमl 

 

मोहब्बत और मौत की पसंद तो देखिए,
एक को दिल चाहिए और दूसरे को धड़कनl
अजीब खेल है ये मोहब्बत का,
किसी को हम न मिले, कोई हमें ना मिला। 

 

जीना तेरी तस्वीर के साथ किसी
ख़ुशी से कम नहीं। 

 

तुझे यूँ ही निहारते रहना,
किसी बंदगी से कम नहीं। 

 

एक दुजे से "मोहब्बत"... ऐसी हो गयी है...
दिल तो "दो" है पर..."धडकन" एक हो गयी हैl 

 

नज़रों से ना देखो हमें
तुम में हम छुप जायेंगे...
अपने दिल पर हाथ रखो तुम ... 
हम वही तुम्हें मिल जायेंगे..! 

 

वो रख ले कहीं अपने पास हमें कैद करके,
काश कि हमसे कोई ऐसा गुनाह हो जाये। 

 

धागा ख़त्म हो गया था मन्नतों में तुम्हे मांग कर,
दिल बांध आये अबकी बार ...
तुम्हारे नाम पर! 

 

इज़हार-ए-इश्क़ करेंगे मगर एक शर्त पर...
फ़ैसला सुनेगी आंखें... तेरी आँखों से!

 

बड़ी कातिल होती है ये मोहब्बत..
साहिब...
धड़कनों की हलचल बंद हो जाती
एक बेरूखी से! 

 

बिक गया मेरा सारा गुरूर...
एक उनकी चाहत खरीदने मेंl 

 

तुम्हे 'हाथों' से नहीं "दिल" से 'छुना' चाहते हैं...

ताकि "तुम" 'ख्वाबों' में नहीं "मेरी रूह" में आ सकोl 

 

"ग़ज़ब" तो है ...

मेरे "दिल" मे 'उसका वजूद' ...

मैं "खुद" से दूर ...

"वो" 'मुझमे' मौजूद!

 

"बंद" रखते हैं 'जुबान' लब 'खोला' नहीं करते...

"चाँद" के सामने "सितारे" 'बोला' नहीं करते...

बहुत "याद" करते हैं हम "आपको" लेकिन...

अपना ये "राज़" 'होंठों' से "खोला" नहीं करते!

 

"नसीब" में अगर "तू" है तो...

"दिल" पर "तू" ही... दस्तक देगा...

"रब" की 'दुआओं' में क्यूँ शामिल करूं...

'शायद' "तू" ही मेरा "रब" होगा!

 

चाहने से "प्यार" नहीं मिलता...

हवा से "फूल" नहीं खिलता...

"प्यार" नाम होता है "विश्वास" का...

"बिना विश्वास" सच्चा "प्यार" नहीं मिलताl 

 

लोग 'आँखों में आँखें' डालकर "इश्क" की बात करते हैं...

हमारी तो 'पलकें' उनके "नाम" से ही 'झुक' जाती हैं!

 

खुबसूरत 'इशारों' में 'वो' हम पर "अपना" 'हक' जता देते है...

'वो' मेरे नही होते...पर हमे "अपना" 'बता' देते है!

 

"घर" से बाहर 'कालेज' जाने के लिए 'वो' "नकाब" मे निकली…

सारी गली उनके 'पीछे' निकली… 

"इनकार" करते थे वो हमारी "मोहब्बत" से… 

और "हमारी" ही 'तस्वीर' उनकी "किताब" से निकली!

 

आसानी से कोई 'मिल' जाये तो वो "किस्मत" का साथ है...

"दोस्तों" ...

सब कुछ 'खोकर' भी जो न मिली उसे "मोहब्बत" कहते हैंl 

 

हम "इश्क" के 'फ़कीर' है... 

'छीनकर' ले जायेंगे... 

"दिल" की 'धड़कनें' तुम्हारी!

 

जिसके हिस्से में "रात" है...

यकीनन "चाँद" भी 'उसी' के "हिस्से" में होगा!

 

"ग़ज़ल" लिखी हमने उनके 'होंठों को चूम' कर...

वो "ज़िद्द" कर के बोले… फिर से सुनाओ! 

 

मैं ये नही कहता 'पगली' कि "तू" नही मिली तो "जान" दे दूंगा...

पर "एक वादा" करता हूँ "तू" मिली तो जिंदगी भर साथ दूंगा!

 

रोज़ 'तारों' को "नुमाइश" में ख़लल पड़ता है... 

"चाँद" पागल है 'अँधेरे' में निकल पड़ता है!

 

तेरी "खूबसूरती" ही तेरी "मुस्कान" है... और...

तेरी "मुस्कान" में ही बसी "मेरी जान" है!

 

रोकने की 'कोशिश' तो बहुत की "पलकों" ने मगर... 

"इश्क" में 'पागल' थे आँसू... "ख़ुदकुशी" करते चले गये! 

 

"शिकायत" और "दुआ" में जब "एक" ही 'शख़्स' हो...

समझ लो "इश्क़" करने की "अदा" आ गयी 'हमें'! 

 

"राहत और चाहत" में... बस 'फर्क' है इतना...

"राहत" बस 'तुमसे' है... और "चाहत" सिर्फ 'तुम्हारी'!

 

"ज़रूरी काम" है लेकिन 'रोज़ाना भूल' जाता हूँ... new

मुझे... 'तुमसे' "मोहब्बत" है 'बताना भूल' जाता हूँ... 

"तेरी गलियों" में 'फिरना' इतना 'अच्छा' लगता है... 

मैं "रास्ता याद" रखता हूँ पर 'ठिकाना भूल' जाता हूँ! 

 

बैठे हैं दिल में ये 'अरमान' जगाये... 

कि वो आज 'नजरों' से हमें 'अपनी' पिलायें... 

मजा तो तब ही 'पीने' का यारों...

इधर हम 'पियें' और "नशा" 'उनको' हो जाये! 

 

धड़कते रहेंगे "तुम्हारे दिल" की 'गहराइयों' में दिन रात हम... 

जो कभी 'खत्म' न हो वो "अहसास" हैं हम! 

 

"जागना" भी 'मंजूर' है मुझे तेरी "यादों" मे..."रात" भर... 

जितना "तेरे एहसासों" में "शुकून" है उतना उस "नींद" मे कहाँ!

 

मैंने भर दिया है मेरे पेज का हर 'पन्ना' तेरी 'यादों' से... 

तु मेरे पेज की हर 'शायरी' से पूछ कि 'इश्क' किसे कहते हैं! 

 

"इश्क़" कभी भी 'पुराना' नहीं होता...

"इश्क़" जैसा कोई 'ख़ज़ाना' नहीं होता...

"इश्क़" रखता है जवाँ 'दिलों' को हमेशा... 

"इश्क़" में 'उम्र' जैसा 'पैमाना' नहीं होता! 

 

तेरा 'अक्स' गढ़ गया है 'आँखों' में कुछ ऐसा...

सामने "खुदा" भी हो तो दिखता है हू-ब-हू 'तुम' जैसा! 

 

गए थे कभी 'हम' भी उनका "दिल" 'चुराने'... 

पर मिल कर उनसे 'हम' 'अपना' ही "दिल गँवा" बैठे! 

 

बादशाह थे हम अपने 'मिजाज़' के... 

कमबख्त "इश्क़" ने 'तेरे दीदार' का "फकीर" बना दिया! 

 

"दुख" में "ख़ुशी" की वजह बनती है... मोहब्बत!

"दर्द" में "यादों" की वजह बनती है... मोहब्बत! 

जब कुछ भी "अच्छा ना लगे" हमें दुनिया में... 

तब हमारे "जीने" की वजह बनती है... मोहब्बत! 

 

ऊपर वाले ने कितने लोगो की "तक़दीर" 'संवारी' है... 

काश वो एक बार "मुझे" भी 'कह' दे कि...

आज 'तेरी' "बारी" है! 

 

मैं कहाँ से लाऊँ कोई 'बताओ' कहाँ "बिकता" है वो...

वो "नसीब"जो तुझे "उम्रभर" के लिए "मेरा" कर दे! 

 

"जागना" भी मंजूर है...

मुझे तेरी "यादों" में "रात" भर... 

जितना "तेरे" एहसासों में "शुकून" है...

उतना उस "नींद" में कहाँ!

 

तेरे "इश्क" का 'कैदी' बनने का अलग ही 'मज़ा' है... 

"छूटने" को 'दिल' नहीं करता और 'उलझने' में 'मज़ा' आता है! 

 

चाहत वो नहीं जो "जान" देती है...

चाहत वो नहीं जो "मुस्कान" देती है... 

ऐ दोस्त 'चाहत' तो वो है... 

जो 'पानी' में "गिरा" 'आँसू' पहचान लेती है! 

 

कितना अजीब है "सुरूर तेरी मोहब्बत" का...

पल भर "तेरे दूर" जाने से "तेरी यादें सताने" लगती है! 

 

इश्क वो नहीं जो तुझे मेरा कर दे...

इश्क वो है जो तुझे किसी और का ना होने दे! 

 

महकी महकी सी जो ये "मेरी लिखावट" है...

लफ़्ज़ों में तेरे "प्यार" की थोड़ी सी "मिलावट" है!

 

"दुआ" करो कि 'वो' सिर्फ "हमारे" ही रहे ... क्योंकि

"हम" भी किसी और के "होना" नहीं चाहते हैं! 

 

"याद" करेंगे तो 'दिन से रात' हो जायेगी ... 

"आईने" में देखिये 'खुद' को हमसे बात हो जायेगी ...

"शिकवा" न करिये हमसे 'मिलने' का ...

"आँखे बंद" करिये हमसे 'मुलाकात' हो जायेगी!

 

"खिलखिला" उठती है 'चाय' तेरे 'होंठो' से लगकर ... 

कहीं उसको भी तुझसे 'इश्क़' तो नहीं हो गया! 

 

हम ने तो अपनी 'गलती सरेआम' बता दी ...

एक 'गुलाब' को एक 'गुलाब' देने की 'खता' की! 

 

तू जो "इजाजत" दे तेरे साथ मैं हो लूँ...

तू जो "मेरा प्यार" 'कुबूल' कर ले...

"तेरे प्यार" में 'खुद' को 'खो' लूँ...

तू जो "हमसफर" बन जाए मेरे यार...

तेरा साथ पाकर मैं "आसमान" छू लूँ! 

 

तेरे ''इंतज़ार'' में मेरा... 'बिखरना इश्क़' है ...

तेरी "मुलाकात" पर... 'निखरना मेरा इश्क़' है!

 

हर बार हम पर 'इल्ज़ाम' लगा देते हो "मोहब्बत" का...

कभी 'खुद' से भी पूछा है इतनी "खूबसूरत" क्यूँ हो! 

 

वो 'कागज़ का टुकड़ा' आज भी ...

"फूलों" की तरह 'महकता' है ...

जिस पर उन्होने 'लिखा' था...

हमें 'तुमसे' "मोहब्बत" है! 

 

"तुमको" देखा तो "मोहब्बत" भी समझ आई ...

वरना इस "शब्द" की 'तारीफ़' ही "सुना" करते थे! 

 

तवज्जो दे अपनी 'तालीम' को ...

ना पड़ 'इश्क़' के अज़ाबों में!

अक्सर 'बर्बाद' वही लोग होते हैं ... 

जो रखते हैं 'फूल किताबों' में! 

 

रेल की तरह 'गुज़र' तो कोई भी सकती है ...

इंतज़ार में 'पटरी' की तरह पड़े रहना ही 'असली इश्क़' है! 

 

तेरी "मोहब्बत" की 'बाजी' को यारा हम 'मान' गए ...

खुद तो 'वादों' से बंधे नही हमे ही 'यादों से बांध' गए! 

 

माना की "दिल" की गलियाँ 'तंग' है पर 'तेरे' लिए...

हमने किसी और का 'आना जाना' "बंद" कर दिया! 

 

घनी 'ज़ुल्फों' के साये में 'चमकता' 'चाँद सा चेहरा' ... 

तुझे देखूं तो कुछ 'रातें सुहानी' 'याद' आती हैं! 

 

तेरे होंठो में भी क्या खूब 'नशा' है ऐ सनम ... 

लगता है तेरे 'जूठे' पानी से ही "शराब" बनती है!