Whatsapp Status in Hindi

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Whatsapp Status in Hindi

Whatsapp Status in Hindi 

 

कहाँ चले जाते हो हमे यूँ छोड़कर...

शायद तुमको पता नहीं कि मेरी शायरी हो तुम!

 

लोग मुझे पत्थर मारने आये तो वो भी साथ थे...

जिनके गुनाह कभी हम अपने सर लिया करते थे!  

 

मत छेड़ उल्फत की बात किसी टूटे दिल के आगे...

जिक्र-ए-मकान अच्छा नहीं किसी बेघर के आगे! 

 

कहीं तुम भी न बन जाना किरदार किसी किताब का... 

लोग बड़े शौक से पढ़ते हैं कहानियाँ बेवफाओं की!

 

उसके दिल मे थोड़ी सी जगह मांगी थी मुसाफिरो की तरह...

उसने तन्हाइयों का एक शहर मेरे नाम कर दिया! 

 

तोड़ कर फेंक दी होगी उसने मेरे तोहफे में दी वो चूड़ियाँ... 

डर था उसे खनकेगी हाथ में तो हम याद आयेंगे! 

 

उस इश्क़ की आग मेरे दिल को आज भी जलाया करती है...

जुदा हुए तो क्या हुआ ये आँख आज भी उनका इंतज़ार करती है! 

 

मौत पर भी है यकीन और मुझे उन पर भी ऐतबार है...

देखते है पहले कौन आती है मेरे पास अब मुझे दोनो का इंतज़ार है! 

 

अजीब सी पहेली है इन हाथों की लकीरों में...

सफ़र लिखा है मगर रास्ता नहीं लिखा...

किसी के लिये किसी की अहमियत खास होती है...

एक के दिल की चाबी हमेशा दूसरे के पास होती है! 

 

ये किसने कह दिया तुमसे कि हम इश्क़ की बाजी हार बैठे हैं...

मोहब्बत में दिल ही लूटाया है पर जान तो बाकी है! 

 

ज़हर पिलाकर अपने हाथों से कहने लगे वो...  

आओ बाहों में दम तोड लेने की हसरत पूरी कर लो!

 

ना चाहते हुए भी जब दिल मेरा छूते हो...

रूहानी मोहब्बत पर और यक़ीन आ जाता है!  

 

ये वो दिल है जो काँटों से भी मोहब्बत कर लेता था...

लेकिन तेरे बदल जाने के बाद फूलों से भी डर लगता!

 

हमे देखकर अनदेखा कर दिया उसने...

बंद आंखों से पहचानने का कभी दावा किया था जिसने!

 

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है... 

दिल न चाह कर भी खामोश रह जाता है... 

कोई सब कुछ कहकर प्यार जताता है... 

कोई कुछ न कहकर भी सब बोल जाता है! 

 

तुझसे नाराज होकर तुझसे ही बात करने का मन... 

ये दिल का सिलसिला भी कभी ना समझ पाए हम!

 

टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्रभर...

चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में! 

 

मोहब्बत का कोई क़ुसूर नहीं उसे तो मुझसे रूठना ही था... 

दिल मेरा शीशे सा साफ़ था और शीशे का अंजाम तो टूटना ही था!

 

रिश्तो की सच्चाई मुझे इतनी तो नहीं मालूम... 

पर इतना पता है... 

जब कोई हमसे बेहतर मिल जाता है तो... 

लोग बात करना छोड़ देते है!

 

लफ़्जों का वज़न उससे पूछो... 

जिसने उठा रखी हो ख़ामोशी लबों पर!

 

मुफ़्त में नहीं सीखा उदासी में मुस्कराने का हुनर... 

बदले में ज़िन्दगी की हर ख़ुशी तबाह की है हमने!

 

जब तक ना लगे बेवफाई की ठोकर दोस्त... 

हर किसी को अपनी पसंद के नाज़ होता है!

 

तारीखों में धीरे धीरे दर्ज हो रहा हूँ मैं... 

आज हूँ पर हर लम्हा गुज़िश्ता हो रहा हूँ मैं!

 

भुलाया है तुम्हें इस बार हमने याद की हद तक...

भला अब चाहते क्या हो ज़हन ही नोंच डालें क्या!

 

अश्कों की कमाई की है ताउम्र हमने...

ये कौन है जो हँसी उधार माँगने आ गया!

 

गुस्से में जो छोड़ जाये वो वापस आ सकता है लेकिन... 

मुस्कुराकर छोड़कर जाने वाला कभी वापस नहीं आता!

 

मेहबुब में वफ़ा ढूँढते हो बड़े नासमझ हो... 

शीशी ज़हर की और उसमें दवा ढूँढते हो!

 

चाहे लाख बंद कर दें मयखाने जमाने वाले...

शहर में कम नहीं है आंखों से पीलाने वाले!

 

सिर्फ यारियाँ ही रह जाती है मुनाफ़ा बन के...

वरना ज़िन्दगी के सौदों में नुक़सान बहुत है!

 

ठुकरा के उसने मुझे कहा कि मुस्कुराओ और...

मैं हंस दिया... 

सवाल उसकी ख़ुशी का था...

मैंने खोया वो जो मेरा था ही नहीं...

उसने खोया वो जो सिर्फ उसी का था!

 

वक्त के इस मोड़ पे कैसा वक्त आया है...

जख्म इस दिल का जुबान पे आया है...

नहीं रोते थे हम काँटों की चुभन से पर...

आज फूलों की चुभन ने हमको रुलाया है!

 

जख्म इतना गहरा है कि इजहार क्या करें... 

हम खुद निशान बन गए वार क्या करें... 

मर गए हम मगर खुली रही आँखें...

अब इससे ज्यादा उनका इन्तजार क्या करें!

 

मोहब्बत करने वाले को इनकार अच्छा नहीं लगता... 

दुनियावालों को इक़रार अच्छा नहीं लगता...

जब तक लड़का लड़की भाग ना जाये... 

घरवालों को प्यार सच्चा नहीं लगता!

 

हर कर्ज मोहब्बत का अदा करेगा कौन...

जब हम नहीं होंगे तो वफ़ा करेगा कौन...

या रब मेरे मेहबूब को रखना तू सलामत... 

वरना मेरे जीने की दुआ करेगा कौन!

 

तेरे इस शहर में मिलने के ठिकाने बहुत से थे... 

अगर तुम दिल से चाहते तो बहाने बहुत से थे!

 

आज शमा फिर अश्को की कतार में आ गई...

जो आग दिल में लगी तपन बाहर आ गई!

 

मोहब्बत की एक मिसाल यह भी बनी... 

अजनबी अजनबी ही रहे यादें ज़िंदगी बनी!

 

अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे याद करते हो तो... 

अब मत करना क्योंकि मैं तन्हा ज़रूर हूँ... 

मगर फ़िज़ूल बिलकुल भी नहीं!

 

बार बार जाती है नजर क्यों तुम पर मेरी कलम की... 

शायद अधूरी मुहब्बत हो तुम मेरे पिछले जनम की!

 

जब गर्द में डूबे हुए हों रहबरों के मिजाज़...

उखड़ी सड़कों पे लगे पत्थर पे रुकता कौन है!

 

अगर उलझा था हमसे तो उसे सुलझा भी सकते थे...

तुम्हारे हाथ में भी रिश्ते का कोई तो सिरा होगा!

 

मरने को मर भी जाऊँ कोई मसअला नहीं...

लेकिन ये तय तो हो कि अभी जी रहा हूँ मैं!

 

कश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया...

मेरी तलाश का भी तो जरिया बदल गया...

न शकल बदली न ही बदला मेरा किरदार...

बस लोगों के देखने का नजरिया बदल गया! 

 

लोग पूछते है कौन है जो तेरी ये हालत कर गया... 

मैं मुस्कुराते हुए कहता हूँ उसका नाम...

हर किसी के लब पर अच्छा नहीं लगता! 

 

चल अब तू अपना हुनर आज़मा के दिखा... 

निकाल दिया तुझे दिल से अब जगह बना के दिखा! 

 

मोहब्बत की एक मिसाल यह भी बनी... 

अजनबी अजनबी ही रहे यादें ज़िंदगी बनी! 

 

आप आए तो ख़याले दिले में कुछ याद आया कि... 

कितने भूले हुए ज़ख़्मों का पता याद आया! 

 

आँखों को इन्तजार का हुनर देकर चला गया... 

चाहा था जिसको वो जाने किधर चला गया! 

 

प्यार किया बदनाम हो गये चर्चे हमारे सरेआम हो गये... 

ज़ालिम ने दिल उस वक़्त तोडा जब हम उसके गुलाम हो गये! 

 

इश्क़ किया है आख़िरी दम तक निभाएंगे...

तू बेवफा है क्या सिर्फ इसलिए तुम्हें भूल जाएंगे! 

 

पत्थर हूँ मैं चलो मान लिया... 

तुम हुनरमंद थे तो मुझे तराशा क्यों नहीं! 

 

इश्क़ का असर हमपे कुछ यूँ रहा... 

अपने ही क़ातिल की वकालत की हमने! 

 

चलते थे इस जहाँ में कभी सीना तान के हम भी... 

ये कम्बख्त इश्क़ क्या हुआ घुटनो पे आ गये! 



तुम सो जाओ अपनी दुनिया में आराम से... 

मेरा अभी इस रात से कुछ हिसाब बाकी है! 

 

पता हैं वो "रब" किस बात पर ख़ुश होता है...

जब तुम उसकी दी हुई बेबसी पर भी राज़ी रहो! 

 

ऐसा नहीं की ज़िंदगी में कोई आरजू नहीं है... 

पर वो ख्वाब पुरा कैसे करुँ जिसमें तू है ही नहीं!

 

ना रख किसी से मोहब्बत की उम्मीद ऐ दोस्त... 

कसम से लोग खुबसूरत बहुत है पर वफादार नहीं!

 

कसम से तुझे पाने की ख्वाहिश तो बहुत थी मगर... 

मुझे तुझसे दुर करने की दुआ करने वाले ज्यादा निकले! 

 

इँतजार करते करते एक और रात बीत जायेगी... 

पता हैं तुम नहीं आओगे और ये तनहाई जीत जायेगी! 

 

नींद भी कितनी अजीब चीज़ होती है... 

आ जाए तो सब भुला देती है... 

और न आए तो बहुत कुछ याद दिला देती! 

 

ना ढूंढ मेरा किरदार दुनियाँ की भीड़ में... 

वफादार तो हमेशा तन्हा ही मिलते हैं! 

 

याद उन्ही की आती है जिनसे दिल के तालुक हो... 

हर किसी से मोहब्बत हो ऐसा तो मुमकिन नहीं!

 

रब ना करे इश्क़ की कमी किसी को सताए... 

प्यार करो उसी से जो तुम्हे दिल की बात बताये... 

प्यार करने से पहले ये कसम जरूर लेना... 

कि हे खुदा ...  

अंतिम साँस तक हम इस प्यार को निभाए!

 

मोहब्बत यह नहीं कि तुम तड़पो... 

और उसे पता भी न चले... 

मोहब्बत तो यह है कि तुम तड़पो तो... 

उसके दिल पर कयामत गुजरे!

 

ख़ूबसूरत चेहरों में कशिश तो लाज़मी है...

मगर ख़ूबसूरत दिल के बग़ैर चाहत अधूरी होती है!

 

फट जाएँगी दिमाग़ की नसें ये किसी दिन मेरी... 

शोर बहुत करती हैं ये यादें तुम्हारी!

 

कुछ लोग मुझसे इसलिए भी नाराज हैं...

क्योकिं मुझे उन से कुछ चाहिए ही नहीं!

 

मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा...

अब इसके बाद मेरा इम्तिहान क्या लेगा! 

 

ऐ आईने मुझे भी दे-दे जरा सा इल्म चेहरे बदलने का...

आ जाए मुझमें भी हुनर जमाने के साथ चलने का! 

 

एक चाहत होती है अपनों के साथ जीने की...

वरना पता तो हमें भी है कि ऊपर अकेले ही जाना है! 

 

तजुर्बा मोहब्बत का भी जरूरी है जिंदगी के लिए...

वरना दर्द में भी मुस्कुराने का हुनर कहाँ से आएगा! 

 

हिसाब किताब हमसे ना पूछ अब ऐ ज़िन्दगी...

तूने सितम नहीं गिने तो हमने भी ज़ख्म नहीं गिने! 

 

याद आयेगी हर रोज मगर तुझे आवाज न दूंगा...

लिखूंगा तेरे ही लिये हर लब्ज़ मगर तेरा नाम न लूंगा! 

 

क्या पता क्या खूबी है उनमे और क्या कमी है हम में...

वो हमें अपना नहीं सकते और हम उन्हे भुला नही सकते! 

 

जलते हुए दिल को और मत जलाना...

रोती हुई आँखों को और मत रुलाना...

आपकी जुदाई में हम पहले से मर चुके हैं...

मरे हुए इंसान को और मत मारना! 

 

दिल जीत लें वो नजर हम भी रखते हैं...

भीड़ में नजर आये वो असर हम भी रखते हैं...

यूँ तो वादा किया है किसी से मुस्कुराने का...

वरना आँखों में समंदर हम भी रखते हैं! 

 

तेरी दुनिया का यह दस्तूर भी अजीब है ऐ खुदा...

मोहब्बत उनको मिलती है जिन्हें करनी नहीं आती! 

 

उन्ही से सीखा है नज़रन्दाज़गी का हुनर...

आज़माया उन्ही पर तो बुरा मान गए! 

 

फिर से महसूस हुई  तेरी कमी शिद्दत से...

आज फिर दिल को मनाने में हमें बड़ी देरी लगी! 

 

जिस दिन बंद कर ली हमने आंखें...

कई आँखों से उस दिन आंसु बरसेंगे...

जो कहते हैं कि बहुत तंग करते है हम उन्हें...

वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे! 

 

कोई आँखों में बात कर लेता है...

तो कोई आँखों-आँखों में मुलाकात कर लेता है...

बेहद मुश्किल होता है जवाब देना...

जब कोई खामोश रहकर सवाल कर लेता है! 

 

मोहब्बत करने में वक़्त कहाँ लगता है...

ज़िन्दगी तो इसे महसूस करने मे लग जाती है! 

 

ऐ बुत-तराश इश्क़ को हैरत में डाल दे...

पत्थर की आँख से कोई आँसू निकाल दे! 

 

न दुख न तकलीफ़ हो तो क्या मजा है जीने में...

बड़े से बड़े तुफान ढल जाते हैं जब आग लगी हो सीने में! 

 

वासिफ़' यह किस मुक़ाम पे लाया मुझे जुनून...

अब उनकी जुस्तजू न अपनी तलाश है! 

 

हर रोज़ सुनाया जाता हूँ जाने मैं कैसा किस्सा हूँ...

मेरे हिस्से में कुछ भी नहीँ फ़िर भी मैं तुम्हारा हिस्सा हूँ! 

 

सांसे खर्च हो रही है बीती उम्र का हिसाब नहीं... 

फिर भी जीए जा रहें हैं तुझे जिंदगी तेरा जवाब नहीं! 

 

आँखों की नजर से नहीं...

हम दिल की नजर से प्यार करते हैं...

आप दिखे या ना दिखे फिर भी हम...

आपका दीदार करते हैं!

 

लोग कहते है जिसे हद से ज्यादा प्यार करो...

वो प्यार की कदर नहीं करता...

पर सच तो यह है कि...

प्यार की कदर जो भी करता है...

उसे कोई प्यार की नहीं करता!

 

तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं…

तेरे बिना जिंदगी भी लेकिन जिंदगी नहीं!

 

मुझे पसंद है तेरी हर एक निशानी...

चाहे दिल का दर्द हो या आँखों का पानी!

 

इश्क करना है तो रात की तरह करो...

जिसे चांद भी कुबूल और उसके दाग भी कुबूल!

 

हो जा मेरी कि इतनी मोहब्बत दूँगा तुझे...

लोग हसरत करेंगे तेरे जैसा नसीब पाने के लिए!

 

टपकती है निगाहों से बरसती है अदाओं से...

मोहब्बत कौन कहता है कि पहचानी नहीं जाती!

 

तुझे याद रखने के शौक में मैंने देख खुद को भुला दिया...

मेरा नाम पूछा किसी ने जब तेरा नाम मैने बता दिया...

अब तू ही बता इससे ज्यादा मोहब्बत कोई करेगा तुझसे!

 

सजदों में भींगती हैं जिनकी आँखें...

वो कभी तकदीर पे कभी रोया नहीं करते!

 

नफरतों के जहान में हमको प्यार की बस्तियां बसानी है...

दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने!

 

तुम्हारी तरह समझदार बन गया हूँ मैं...

अब ये मत कहना बदल गया हूँ मैं!

 

माना की नसीब में मेरे कोई सनम नहीं...

फिर भी कोई शिकवा कोई गम नहीं...

तन्हा थे और तन्हा ही जी रहे हैं हम...

बदनसीब तो वो है जिनके नसीब में हम नहीं!

 

कोशिश तो की थी दिल को दायरे में रखने की...

मगर ये तो इश्क है जनाब हदें कहाँ जानता है!

 

हमसे शिकायत ना हो हमारे चाहने वालों को...

इसीलिए दिल से कभी यादों के जाले नहीं हटाए...

बना न सका किसी का घर तो...

किसी का आशियाना भी ना उजड़े...

ये सोच कर कभी अपने हाथों से घर के जाले नहीं हटाए!

 

तासीर ही उल्टी है जाम-ए- मोहब्बत की...

हम जिसे पिलाते हैं जहर उगलता है!

 

हर किसी का दिल टुटा मिला इश्क़ और प्यार में...  

कोई तो होगा जो सिर्फ खुश होगा ऐ इश्क़ तेरी कतार में!

 

कम ही होते हैं जज्बातों को समझने वाले...

इसलिए शायद शायरों की बस्तियाँ नहीं होती...

कैद कर दिया सापों को ये कहकर सपेरे ने...

बस अब इंसानों को डसने के लिये इंसान ही काफी है!

 

जिसे चाहे इश्क़ में निशाना बनाकर हलाल कर देना तुम... 

पर आपसे सिर्फ इतनी सी गुजारिश है कि...

कंधा तो खुद का इस्तेमाल करना!

 

सब कुछ कर सकता हुँ...

मगर फिर से मोहब्बत नहीं!

 

मेरी चाहत में कमी कुछ न थी जाने क्यों वो बेगाने से हो गए...

वो समझते हैं खुश हूं मैं लेकिन मुझे हंसे तो कई जमाने हो गए!

 

ना दूर हमसे जाया करो दिल तड़प जाता है...

आपके ख्यालों में ही हमारा दिन गुज़र जाता है...

पूछता है यह दिल एक सवाल आपसे कि...

क्या दूर रहकर भी आपको हमारा ख्याल आता है!