Urdu Poetry in Hindi

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Urdu Poetry in Hindi

Urdu Poetry in Hindi 

 

मिट जाए "गुनाहों का तसव्वुर" ही जहां से इकबाल...

अगर हो जाए "यकीन" के "अल्लाह" देख रहा है... 

दिल पाक नहीं तो पाक हो नहीं सकता इनसान... 

वर्ना इबलीस को भी आते थे "वज़ू के फराईज़" बहोत... 

सर झुकाने से "नमाज़ें अदा" नहीं होतीं... 

दिल झुकाना पड़ता है "इबादत" के लिए... 

इक़बाल ने तोड़ दी "तसबीह" इस लिए... 

क्या गिन के नाम लूं उस "ख़ुदा" का जो बे हिसाब देता है... 

कोई "इबादत" की "चाह" में रोया... 

कोई इबादत की "राह" में रोया... 

अजीब है ये नमाज़े मुहब्बत का सिलसिला इक़बाल... 

कोई क़ज़ा कर के रोया,  

कोई अदा कर के रोयाl