Top 50 God Shayari in Hindi

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Top 50 God Shayari in Hindi

Top 50 God Shayari in Hindi

 

तू 'नाराज' न रहा कर तुझे 'वास्ता है खुदा' का …

एक तेरा ही 'चेहरा खुश' देख कर तो मैं अपना 'गम भुलाता' हूँ! 

 

God Shayari in Hindi

 

"दोस्ती" के 'मायने' कभी "खुदा" से 'कम' नहीं होते ... 

अगर "खुदा" 'करिश्मा' है तो ...

दोस्त भी "जन्नत" से 'कम' नहीं होते हैं! 

 

"मोहब्बत" को जो निभाते हैं उनको मेरा "सलाम" है ...

और जो बीच 'रास्ते' में "छोड़" जाते हैं उनको हमारा ये 'पैगाम' है ...

वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर 'खुद' को "फ़ना" करो ...

वरना "खुदा" के लिए किसी की ज़िंदगी ना 'तबाह' करो! 

 

'ज़िन्दगी' हसीन है 'ज़िन्दगी' से "प्यार" करो … 

हो 'रात तो सुबह' का 'इंतज़ार' करो … 

वो 'पल' भी आएगा जिस पल का "इंतज़ार" है आपको … 

बस "रब" पर 'भरोसा' और "वक़्त" पे 'ऐतबार' करो!  

 

God Shayari in Hindi

 

तेरा "अक्स" गढ़ गया है 'आँखों' में कुछ ऐसा ...

सामने "खुदा" भी हो तो दिखता है हू-ब-हू "तुझ" जैसा! 

 

वो 'छोड़' के गए हमें ...  

न जाने उनकी क्या 'मजबूरी' थी ...

"खुदा" ने कहा इसमें उनका कोई 'कसूर' नहीं ...

ये "कहानी" तो मैंने 'लिखी ही अधूरी' थी!

 

तु मिल गई तो अब खुदा भी नाराज है मुझसे ... 

कहता है की अब तु कुछ मांगता ही नहीं मुझसे! 

 

God Shayari in Hindi

 

'अल्फाजों' से क्या बयाँ करु अपनी "मोहब्बत" के 'अफसाने' ... 

हमारे 'दिल' मे तो "वो" ही हो ओर "उसके" 'दिल' की "खुदा" जाने! 

 

"जीने" की उसने 'हमें' नई "अदा" दी है ...

"खुश" रहने की उसने "दुआ" दी है ...

ऐ "खुदा" उसको 'खुशियाँ' तमाम देना ...

जिसने अपने "दिल" मे हमें जगह दी है! 

 

"मत" करना कभी भी 'गुरुर' अपने "आप" पर ऐ 'इन्सान' ... 

न जाने "खुदा" ने 'तेरे' और 'मेरे' जैसे कितने को ...  

"मिटटी" से बनाकर "मिटटी" में 'मिला' दिए! 

 

God Shayari in Hindi

 

"करम" ही करना है 'तुझको' तो ये 'करम' कर दे … 

मेरे "खुदा" तू मेरी 'ख्वाहिशों' को "कम" कर दे! 

 

लोगों ने 'रोज' ही नया कुछ 'माँगा' "खुदा" से ...

एक 'हम' ही हैं जो "तेरे ख्याल" से 'आगे' न गये! 

 

कोई "रास्ता" नहीं 'दुआ' के सिवा ...

कोई "सुनता" नहीं 'खुदा' के सिवा ...

मैंने भी 'जिंदगी' को करीब से देखा है 'मुश्किल' में ...

कोई साथ नहीं देता, 'खुदा' के सिवा!  

 

God Shayari

 

एे "खुदा" इस 'दुनिया' में एक और भी "कमाल" कर ...

या 'इश्क़' को "आसान" कर या 'खुदकुशी' "हलाल" कर! 

 

सिर्फ मैं ही "हाथ" थाम सकूँ 'उसका' … 

'मुझ' पर इतनी "इनायत" सी कर दे …

'वो' रह ना पाये इक "पल" भी 'मेरे बिना' … 

ऐ "रब" .. 'उसको' "मेरी आदत" सी कर दे! 

 

"नसीब" में अगर 'तू' है तो ...

"दिल" पर तू ही...'दस्तक' देगा ... 

"रब" की 'दुआओं' में क्यूँ शामिल करूं ...  

शायद तू ही मेरा "रब" होगा! 

 

God Shayari

 

जज़्बातों में 'बहकर' खुद को किसी के 'अधीन' मत कीजिये ...

"खुदा" और "खुद" के अलावा किसी पर 'यक़ीन' मत कीजिये! 

 

हम तो "उनके" दीदार के "बहाने" आते थे तेरे 'दर' पे ...

'माफ़' करना "खुदा" अगर हमसे "इबादत" ना हुई तो!  

 

तेरा हुआ 'ज़िक्र' तो हम तेरे "सजदे" में 'झुक' गये ...

अब क्या 'फर्क' पड़ता है...  

"मंदिर" में 'झुक' गये या "मस्जिद" में 'झुक' गये! 

 

God Shayari in Hindi

 

"मुस्कुराते" फूलों में न दिखा तो "पत्थर" के 'मूरत' में क्या दिखेगा ... 

"इबादत" की 'नज़र' से देखोगे तो 'ज़र्रे-ज़र्रे' में "खुदा" दिखेगा! 

 

'कोशिश' न कर... तू सभी को "ख़ुश" रखने की ... 

"नाराज" तो यहाँ 'कुछ' लोग... "खुदा" से भी है!

 

क्या 'दुआ' करू मैं अपने 'दोस्तों' के लिए ...

ऐ ख़ुदा बस यही 'दुआ' है कि ...  

मेरे "दोस्त" कभी किसी 'दुआ' के "मोहताज" न हो!  

 

Top 50 God Shayari in Hindi

 

जब मैंने 'ख़ुद' पर 'दस्तक' दी ... 

तो दरवाज़ा 'ख़ुदा' ने खोला! 

 

'खुश नसीब' हूँ मै जब कभी 'राह' में 'भटक' जाता हूँ तो ... 

'भगवान' का दिया 'तोहफा' मेरी "माँ" मेरी 'हाथ थाम' लेती है!  

 

एक चांद ही 'गवाह' था हम दोनों की 'मोहब्बत' का ... 

औऱ ...

'ऊपर' वाले ने 'फैसले' के लिये 'अमावस की रात मुकर्रर' कर दी!  

 

God Shayari in Hindi

 

'तुम' लाख "दुआ" करलो मुझसे 'दूर' जाने की …

मेरी 'दुआ' भी उसी "खुदा" से है तुझे 'करीब' लाने की! 

 

सभी 'गुनाह' मेरे नही होंगे...

जान कुछ 'गुनाह' तो तेरे भी तो होंगे ...

तभी "खुदा" ने मुझे "तुझसे" और तुझे... 

मुझसे "जुदा" कर दिया "जान"!

 

"तुम" जैसा 'मोती' पूरे "समुंदर" में नहीं है ... 

वो चीज़ 'माँग' रहा हूँ जो "मुक़्दर" मे नहीं है ... 

"किस्मत" का लिखा तो 'मिल' जाएगा मेरे "ख़ुदा" ... 

वो चीज़ "अदा" कर जो 'किस्मत' में नहीं है!

 

God Shayari in Hindi

 

'नमाज' अदा करने के बाद "दुआ" जरूर माँगा करो ... 

और "दुआ" में जो अपने लिये 'चाहते' हो ... 

वो 'सभी' के लिये "माँगना" बेहतरीन 'अमल' है!