Top 100 Sad Quotes in Hindi

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Top 100 Sad Quotes in Hindi

Top 100 Sad Quotes in Hindi

 

उलझे हुए हैं अपनी उलझनों मे आज कल...

आप ये न समझना के अब वो लगाव नहीं रहा!

 

सीख जाओ वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना...

कहीं कोई थक ना जाए तुम्हें एहसास दिलाते-दिलाते!

 

तन्हाई से इस कदर "मोहब्बत" हो गयी कि...

हमें अपना साया भी साथ हो तो "भीड़" सी लगती है! 

 

ना लफ़्ज़ों का लहू निकलता है ना किताबें बोल पाती हैं...

मेरे दर्द के दो ही गवाह थे और दोनों ही बेजुबां निकले!

 

तुझे भूलकर भी न भूल पायेगें हम...

बस यही एक वादा निभा पायेगें हम...

मिटा देंगे खुद को भी जहाँ से लेकिन...

तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम!

 

इश्क लिखना चाहा तो कलम भी टूट गयी…

ये कहकर अगर लिखने से इश्क मिलता तो...

आज इश्क से जुदा होकर कोई टूटता नहीं! 

 

तू हजार बार रुठेगी फिर भी तुझे मना लूँगा...

तुझसे प्यार किया हे कोई गुनाह नहीं...

जो तुझसे दूर होकर खुद को सजा दूँगा!

 

मरने को मर भी जाऊँ कोई मसला नहीं...

लेकिन ये तय तो हो कि अभी जी रहा हूँ मैं!

 

कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग...

दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते!

 

कुछ खास नही बस इतनी सी है मोहब्बत मेरी...

हर रात का आखरी खयाल और...

हर सुबह की पहली सोच हो तुम!

 

इस नाज़ुक दिल में किसी के लिए इतनी मोहबत आज भी है...

कि हर रात जब तक आँखे ना भीग जाये नीद नहीं आती!

 

तुझसे अच्छे तो जख्म हैं...

मेरे उतनी ही तकलीफ देते हैं...

जितनी बर्दाश्त कर सकूँ!

 

अगर फुर्सत के लम्हों में मुझे याद करते हो तो अब मत करना... 

क्योंकि मैं तन्हा जरूर हूँ मगर फ़िज़ूल बिलकुल नहीं! 

 

उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर तो ना उठाओ...

जिसे हो शक़ वो मुझसे निभाकर देखे!

 

टूटे हुए सपने से खुली आज सुबह फिर आँख...

सपना आज फिर चुभेगा दिन भर!

 

कोई दुश्मनी नहीं ज़िन्दगी से मेरी...

बस ज़िद्द है तेरे साथ जीना है!

 

मेरे चुप रहने से नाराज़ ना हुआ करो...

कहते है टूटे हुए लोग हंमेशा ख़ामोश हुआ करते है!

 

राज ज़ाहिर ना होने दो तो एक बात कहूँ...

मैं धीरे-धीरे तेरे बिन मर जाऊँगा!

 

ज़रा देखो ये दरवाज़े पर दस्तक किसने दी है... 

अगर इश्क़ हो तो कहना यहाँ दिल नहीं रहता! 

 

हर शख्स परिन्दोँ का हमदर्द नहीं होता दोस्तों... 

बहुत बेदर्द बैठे हैँ दुनिया मे जाल बिछाने वाले! 

 

तेरी ख़ुशी की खातिर मैंने कितने ग़म छिपाए...

अगर मैं हर बार रोता तो तेरा शहर डूब जाता!

 

मोहब्बत मे हम पहले जैसे आज भी है...

मोहब्बत अपने मायने बदल बैठी तो हम क्या करें! 

 

झूठे हैं वो जो कहते हैं हम सब मिट्टी से बने हैं...

मैं कई अपनों से वाकिफ़ हूँ जो पत्थर के बने हैं! 

 

खुद को समेट के खुद में सिमट जाते हैं हम...

एक याद उसकी आती है फिर से बिखर जाते है हम!

 

आँखों में देखी जाती हैं प्यार की गहराईयाँ... 

शब्दों में तो छुप जाती हैं बहुत सी तन्हाईयाँ! 

 

किसी से रिश्ता क्या है...

ये हमें मालूम हो जरुरी तो नहीं....

हाँ उस रिश्ते में कितना अपनापन है...

ये महसूस होना जरुरी है!

 

आँखे दोस्तों की हो या मेरी हो...

बस इतनी सी ख्वाहिश है कभी नम न हो!

 

खामोश तुम्हारी "नजरों" ने...

एक "काम" गजब का कर डाला...

पहले थे हम "दिल" से तन्हा...

अब "खुद" से ही "तन्हा" कर डाला! 

 

नहीं है शिकवा हमे किसी की बेरुखी से… 

शायद हमे नही आता किसी के दिल में घर बनाना!

 

मोहब्बत की बर्बादी का क्या अफसाना था... 

दिल के टुकड़े हो गये पर लोगो ने कहा वाह क्या निशाना था!

 

दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो...

धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं!

 

इस दिल की हर धड़कन का एहसास हो तुम...

तुम क्या जानो हमारे लिए कितने ख़ास हो तुम...

जुदा होकर तुमने हमे मौत से भी बदतर सज़ा दी है...

फिर भी इस तड़पते हुए दिल ने तुम्हें खुश रहने की दुआ दी है!

 

हम भूल जाये ऐसी दिल की हसरत कहाँ...

वो याद करे हमे इतनी उसे फुर्सत कहाँ...

जिनके चारो तरफ हो अपनों का साथ... 

उन्हें हमारी जरुरत कहाँ!

 

रास्ता ऐसा भी दुशवार न था...

बस उसको हमारी चाहत पे ऐतबार न था...

वो चल न सकी हमारे साथ वरना... 

हमें तो जान देने से भी इनकार न था!

 

लोग मोहब्बत को खुदा का नाम देते है...

कोई करता है तो इल्जाम देते हैं...

कहते हैं कि पत्थर दिल रोया नही करते...

और पत्थर के रोने को झरने का नाम देते है!

 

आज उन्हे फुर्सत नही हमसे बात करने की...

ये जिन्दगी गुजर गई उनकी फरियाद करके...

वो आए हमारी मौत पर...

तो कह देना अभी सोया है आपको याद करके!

 

साथ में गुजारी हर वो, शाम भूल गए...

मोहब्बत वाली बातें तमाम भूल गए...

कायनात में कायम बहुत कम ही रहते हैं अपने वादे पे...

फिर भी गिला यही है कि तुम मेरा नाम भूल गए!

 

हर इल्जाम का हकदार वो हमें बना जाते हैं...

हर खता कि सजा वो हमें सुना जाते हैं...

हम हरबार खामोश रह जाते हैं...

क्योकी वो अपना होने का हक जता जाते हैं!

 

पाई थी हर चीज़ जो चाही मैंने ज़िन्दगी में...

बस तेरी उल्फत के आगे मैं हो गया बर्बाद...

कब तक राह देखता मैं भी तेरे आने की...

अरसो से कर रहा हूँ मैं तेरा इंतज़ार!

 

बहुत समझाया ख़ुद को मगर समझा नही पाये...

बहुत मनाया ख़ुद को मगर मना नही पाये...

जाने वो क्या जज्बा था वो एहसास था...

खूब भुलाना चाहा उसे हमने मगर भुला नही पाये!

 

लबों पे नाम है जिनका उन्हें कुछ भी खबर नहीं...

गजल में दर्द है जिनकाउन्हें कुछ भी खबर नहीं!

 

बात तो सिर्फ जज़्बातों की है यारों...

वरना मोहब्बत तो सात फेरों के बाद भी नहीं होती! 

 

क्या ज़रुरत थी पगली चोट-ए-बेवफाई कि...

नादान दिल था तेरे झूठे वादों में ही खुश था!

 

न जाने कब खर्च हो गये पता ही न चला...

वो लम्हें जो छुपा कर रख्खे थे जीने के लिये!

 

हम तो अपना हर एक लम़्हा तुम पे ही वारते...

तुम्हे मुस्कुराते देख हम भी मुस्कुरा कर अपना जीवन गुज़ारते!

 

कलम उठाई है लफ्ज नहीं मिलता...

जिसको ढूंढ रहे हैं वह शख्स नहीं मिलता...

फिरते हैं वह जमाने मैं सबके साथ में...

बस हमारे लिए ही उन्हें वक्त नहीं मिलता!

 

जब तक तुम्हें न देखूं दिल को करार नहीं आता...

अगर किसी गैर के साथ देखूं तो फिर सहा नहीं जाता!

 

उतना हसीन फिर कोई लम्हा नहीं मिला...

तेरे जाने के बाद कोई भी तुझ सा नहीं मिला...

सोचा करूँ मैं एक दिन खुद से ही गुफ्तगू...

लेकिन कभी मैं खुद को तन्हा नहीं मिला!

 

तुझे भूलकर भी न भूल पायेगें हम...

बस यही एक वादा निभा पायेगें हम...

मिटा देंगे खुद को भी जहाँ से लेकिन...

तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम!

 

इस छोटे से दिल में किस-किस को जगह दूँ मैं...

गम रहे दर्द रहे फरियाद रहे या तेरी याद रहे!

 

ये लाली ये काजल ये जुल्फें भी खुली खुली...

तुम यूँ ही जान मांग लेती इतना इंतजाम क्यूँ!

 

न कोई किसी से दूर होता है...

न कोई किसी के करीब होता है...

प्यार खुद चल कर आता है...

जब कोई किसी का नसीब होता है!

 

गैर थे कौन अपने थे कौन हम ये समझ न पाए...

हमने देखा जिधर भी चेहरे बदले से नजर आए!

 

हम पाने लगे हैं सवाल जवाबों में आजकल...

दिल ढूंढता है तुझको किताबों में आजकल!

 

खोजती है निग़ाहें उस चेहरे को...

याद में जिसकी सुबह हो जाती है!


भुलाना और भूल जाना तो बस एक वहम है दिल का...

भला कौन निकलता है दिल से एक बार बस जाने के बाद!

 

जब-जब लगा कि तेरे लिए ख़ास हूँ मैं...

तेरी बेरूखी ने समझा दिया कि झूठी आस में हूँ मैं!

 

दीवाने है तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं...

कैसे कहें कि तुमसे प्‍यार नहीं कुछ तो कसूर है...

आपकी आखों का हम अकेले तो गुनहगार नहीं!

 

अपने दिल की बात उनसे कह नहीं सकते...

बिन कहे भी जी नहीं सकते...

ऐ खुदा! ऐसी तकदीर बना कि...

वो खुद हम से आकर कहे कि...

हम आपके बिना जी नही सकते!

 

गुज़रे है आज इश्‍क के उस मुकाम से...

नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से!

 

एक आरज़ू सी दिल मैं अक्सर छुपाये फिरता हूँ…

प्यार करता हूँ तुझ से पर कहने से डरता हूँ...

नाराज़ ना हो जाओ कहीं मेरी गुस्ताखी से तुम...

इसलिए खामोश रह कर भी तेरी धड़कन को सुना करता हूँ!

 

"मन्नत" पूरी होते ही वो इतने "मशरूफ" हो गये...

की जमाना तो "याद" रहा सिर्फ हमें "भूल" गए!

 

कुछ इस तरह वो मेरी बातों का ज़िक्र किया करती है...

सुना है वो आज भी मेरी फिक्र किया करती है!

 

कभी कभी हम "दिल" के "हालात" भी "लिखते" हैं...

हर वक़्त वाह वाह की "ख्वाहिश" नहीं होती!

 

लफ्जों से इतना आशिकाना ठीक नहीं है ज़नाब...

किसी के दिल के पार हुए तो इल्जाम क़त्ल का लगेगा!

 

हाथ की लकीरे सिर्फ सजावट बयाँ करती है...

किस्मत अगर मालूम होती तो कभी मोहब्बत ना करते!

 

दिल ने सोचा था के उसे टूट कर चाहेंगे...

सुच मानो टूटे भी बहुत चाहा भी बहुत!

 

सलीका हो अगर भीगी हुई आँखों को पढने का हुनर तो...

बहते हुए आंसू भी अक्सर बात करते हैं!

 

अपनी ख़ुशी के लिए दूसरों की ख़ुशी को ख़ाक में ना मिलाओ...

तुम्हारी वो ख़ुशी बेकार है जिस के पीछे किसी के आंसों आ पड़े!

 

जब ज़मीर समझौता करना छोड़ दे तो...

समझ लो अब इंसानियत ख़तम हो गई!

 

कुछ इस तरह से गई तू मुझसे मेरी ज़िंदगी लेकर...

कि चाह कर भी जी न सके तेरे जाने के बाद!

 

मोहब्बत भी उस मोड़ पे पहुँच चुकी है...

कि अब उसको प्यार से भी मेसेज करो...

तो वो पूछती है कितनी पी है!

 

मुस्कराते रहो तो दुनिया आप के कदमों मे होगी...

वरना आसुओ को तो आखे भी जगह नहीं देती!

 

उड़ जाएंगे एक दिन तस्वीर से रंगों की तरह...

हम वक्त की टहनी पर बेठे हैं परिंदों की तरह! 

 

खता उनकी भी नहीं वो भी क्या करते... 

बहुत चाहने वाले थे किस-किस से वफा करते!

 

चाहने से प्यार नहीं मिलता...

हवा से फूल नहीं खिलता...

प्यार नाम होता है विश्वास का...

बिना विश्वास सच्चा प्यार नहीं मिलता!

 

बहुत रोये वो हमारे पास आ के जब एहसास हुआ...

उन्हें अपनी ग़लती का चुप तो करा देते हम...

अगर चेहरे पे हमारे कफ़न ना होता!

 

मै फिर याद आऊंगा उस दिन जब तेरे ही...

बच्चे कहेंगे... मम्मी आपने कभी किसी से प्यार किया था!

 

वो भी क्या ज़िद्द थी जो तेरे मेरे बीच एक हद थी...

मुलाकात मुकम्मल ना सही मुहब्बत बेहद थी!

 

उनकी नजरों का तीर तो बस हमारी जान लेने का बहाना था...

दिल हमारा बिखर गया वो बोली वाह... क्या निशाना था!

 

सोचा ना था वो शख्स भी इतना जल्दी साथ छोङ जाएगा...

जो मुझे उदास देखकर कहता था “में हुँ ना”!

 

टपक पड़ते है आँसू जब किसी की याद आती है...

ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता!

 

फिर यूँ हुआ कि सब्र की उँगली पकड़ के हम...

इतना चले के रास्ते हैरान रह गए!

 

भुलाना और भूल जाना तो बस एक वहम है दिल का...

भला कौन निकलता है दिल से एक बार बस जाने के बाद!

 

दुनिया खरीद लेगी हर मोड़ पर तुझे...

तूने जमीर बेचकर अच्छा नहीं किया!

 

जो मैं वक़्त बन जाऊं तू बन जाना लम्हा...

मैं तुझमें गुजर जाऊं तू मुझमें गुजर जाये!

 

मेरी ज़िन्दगी की ये सबसे बड़ी तमन्ना हैं...

मेरे पास रहो तुम हमेशा मेरी साँस बनके!

 

कहां कोई मिला जिस पर दिल लुटा देते...

हर एक ने धोखा दिया किस किस को भुला देते...

रखते हैं दिल में छुपा के अपना दर्द...

करते बयान तो महफिल को रुला देते!

 

लिख चुके हैं तेरे लिए एहसास बहुत सारे...

फिर भी जितना तुझे चाहा कभी लिख नहीं पाये!

 

तूने फेसले ही फासले बढाने वाले किये थे...

वरना कोई नहीं था, तुजसे ज्यादा करीब मेरे!

 

गैर थे कौन अपने थे कौन हम ये समझ न पाए...

हमने देखा जिधर भी चेहरे बदले से नजर आए!

 

हालात ने तोड़ दिया हमें कच्चे धागे की तरह...

वरना हमारे वादे भी कभी ज़ंजीर हुआ करते थे!

 

लिखने को तो हम आधा इश्क़ लिख दें...

क्योंकि तुम बिन पूरा सम्भव नहीं होगा!

 

काश कोई तो पैमाना होता मोहब्बत को नापने का...

तो हम भी शान से आते तेरे सामने सबूत के साथ!

 

आज उसने हमें एक और दर्द दिया तो हमें याद आया...

कि दुआओं में हमने ही तो उसके सारे दर्द मांगे थे!

 

हम तो कल भी तन्हा थे आज भी अकेले हैं...

तो क्या हुआ जो तूने एहसास करा दिया कि मेरा कोई नहीं!

 

याद आती है तो ज़रा खो जाते है...

आंसू आँखों में उतर आये तो ज़रा रो लेते हैं...

नींद तो नहीं आती आँखों में लेकिन...

वो ख्वाबों में आएंगे यही सोच कर सो लेते हैं!