Love Quotes in Hindi

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Love Quotes in Hindi

Love Quotes in Hindi

 

ये "दिल" न जाने क्या कर बैठा... 

मुझसे "बिना" पूछे ही 'फैसला' कर बैठा! 

इस 'ज़मीन पर टूटा' "सितारा" भी नहीं 'गिरता'...

और ये पागल... 'चाँद' से "मोहब्बत" कर बैठा।

 

जब भी उसके "नाज़ुक" बदन को 'छूता' हूं...

'समंदर की लहरों' सा "महसूस" करता हूं...

'छुई मुई' सी है मानो वह मेरी "जानम"...

एक 'छुवन' से उसके 'मुरझाने' से "डरता" हूं!

 

"प्यार" खुद चल कर आता है...

जब कोई... किसी का "नसीब" होता है। 

 

"बचपन" के 'खिलौने' सा कहीं 'छुपा' लूँ तुम्हें...

आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और 'पा' लूँ तुम्हें। 

 

"लाल चूड़ियाँ" तेरे 'हाथ' में लगती है ऐसे ... 

जैसे "चाँद" पर 'रख' दिया हो किसी ने कुछ "फूल गुलाब" के!

 

एक बार उसने कहा था मेरे 'सिवा' किसी से "प्यार" ना करना...

बस फिर क्या था तब से "मोहब्बत की नजर" से... 

हमने "खुद" को भी नहीं देखा!

 

कौन कहता है कि 'आपकी तस्वीर' बात नहीं करती...  

हर सवाल का 'जवाब' देती है बस "आवाज़" नहीं करती!

 

मांगने को तो बहुत कुछ "मांग" लूँ तुम से...

क्या दोगे? अगर मै 'तुमसे' "तुम" ही को "माँग" लूँ!

 

तुम्हारी एक "मुस्कान" से 'सुधर' जाती है 

"तबियत मेरी" ... 

बताओ? यार "इश्क" करती हो या "इलाज" करती हो!

 

ज़िद तो "मोतियों" की होती है 'बिखर' जाने की...

हम तो "धागा" हैं "तुमको" पिरो के रखेंगे अपनी "मोहब्बत" में। 

 

उन्होंने ने कहा... तुम्हारी आँखें बहुत "खूबसूरत" है...

हमने भी कह दिया... "आपके ख्वाब" जो देखती हैं। 

 

जिसकी "सज़ा" सिर्फ तुम हो...

'मुझे' ऐसा कोई "गुनाह" करना है। 

 

हर रात को "तुम" इतना 'याद' आती हो कि हम 'भूल' जाते है...

ये रातें 'सपनों' के लिए होती है या 'तुम्हारी यादों' के लिए। 

 

"मोहब्बत" सिर्फ लफ्जो से 'बयां' नहीं होती...

"अदाओं" में भी 'कुछ राज छूपे' होते है! 

'इजहारे-मुहब्बत' के सवालो में ही "खतम" हो गए 'रिश्ते'...

आप कोई "जवाब" देते तो शायद "संवर" जाते 'हम'! 

 

"मोहब्बत" और "मौत" की 'पसंद' तो देखिए...

'एक' को... "दिल" चाहिए और 'दूसरे' को... "धड़कन"...

'अजीब खेल' है ये "मोहब्बत" का...

किसी को 'हम' न मिले... 

कोई 'हमें' ना मिला!

 

"जीना" तेरी 'तस्वीर' के साथ किसी... 

"ख़ुशी" से कम नहीं। 

 

"तुझे" यूँ ही 'निहारते' रहना...

किसी 'बंदगी' से "कम" नहीं। 

 

एक दुजे से "मोहब्बत"..."ऐसी" हो गयी है...

दिल" तो दो है पर..."धडकन" एक हो गयी है। 

 

"आदत" बदल दू कैसे तेरे 'इंतज़ार' की... 

ये बात अब नहीं है मेरे 'इखतियार' की... 

देखा भी नहीं तुझ को फिर भी याद करते है... 

बस ऐसी ही खुश्बू है दिल में तेरे प्यार की! 

 

"मोहब्बत" एक जाम का 'खेल' है...

"प्यार" दो "दिलों" का मेल है!

"तुम" भी मेरी तरह के 'आशिक' बनो...

क्योंकि "मोहब्बत" एक "खूबसूरत" 'जेल' है!  

 

अगर "तुम" से न मिले होते... 

ये 'राज़' ही रहता जिंदगी भर... 

"मोहब्बत" कैसी होती है... 

"तुम" से मिल कर जान गया ये "दिल" ... 

कि "मोहब्बत" ऐसी होती है! 

 

तेरे सिवा कौन "समा" सकता है मेरे 'दिल' में... 

"रूह" भी 'गिरवी' रख दी है मैंने तेरी 'चाहत' में! 

 

'मेंहदी' का नहीं जनाब 'रंग' तो "मोहब्बत" का होता है... 

'चाँद दुआ इबादत खुदा" सब "महबूब" में होता है! 

 

बहुत 'वक़्त' लगा हमें "आप" तक आने में... 

बहुत 'फरियाद' की "खुदा" से 'आपको' पाने में... 

कभी यह "दिल" तोड़ कर 'मत' जाना... 

हमने 'उम्र' लगा दी ऐ-सनम "आपको" पाने में! 

 

"किस्मत" पे नाज़ है तो वजह तेरी "मोहब्बत" है... 

"खुशियाँ" जो 'पास' है तो वजह तेरी "मोहब्बत" है... 

मैं तुझसे "मोहब्बत" की 'तलब' कैसे ना करूँ... 

चलती यह 'सांस' है तो वजह तेरी "मोहब्बत" है! 

 

इबादत गारों की 'बस्ती' में पता "इश्क़" का पूछते हो... 

बड़े "नादान" हो यार जो 'रूह' से पता 'जिस्म' का पूछते हो! 

 

"आँखों" में भी ना 'समेट' सकोगे "मोहब्बत" इतनी करेंगे सनम...

"तेरी चाहत" की 'तमन्ना' में "फना" अपना 'वज़ूद' करेंगे! 

 

'तुझको' देखा तो फिर 'किसी' को नहीं देखा... 

'चाँद' कई बार 'कहता' रहा "मैं चाँद हूँ... मैं चाँद हूँ"! 

 

तुम भी "मोहब्बत" के सौदे बड़े 'अजीब' करते हो... 

बस यूँ निगाहों से 'मुस्कराते' हो और "दिल" 'खरीद' लेते हो! 

 

वो लोग बहुत 'ख़ास' होते है हमारी 'जिंदगी' में... 

जो 'अपनी नींद' "भूल" जाते है 'हमसे बात' करने के लिए! 

 

"ज़िंदगी" में आपकी 'एहमियत' हम 'आपको' बता नहीं सकते...

"दिल" में 'आपकी' जगह हम आपको 'दिखा' नहीं सकते... 

कुछ "रिश्ते" बहुत 'अनमोल' होते हैं... 

इससे ज्यादा 'हम' आपको 'समझा' नहीं सकते!

 

सामने बैठे रहो "दिल" को 'करार' आएगा... 

जितना देखेंगे 'तुम्हें' उतना ही "प्यार" आएगा! 

 

'तु' मिल गई तो अब "खुदा" भी 'नाराज' है मुझसे... 

कहता है की अब 'तु' कुछ "मांगता" ही नहीं मुझसे!

 

सबसे अलग सबसे 'न्यारे' हो आप... 

तारीफ कभी पूरी ना हो इतने 'प्यारे' हो आप... 

आज पता चला कि 'जमाना' क्यों 'जलता' है? हमसे... 

क्योंकि 'दोस्त तो आखिर' हमारे हो 'आप'! 

 

हजार 'रातों' में वो 'एक रात' होती है...

जब 'उनसे' बात होती है... 

नज़रे 'उठाकर' देखते हैं जब 'वो' मुझे... 

वो 'एक पल' पूरी "कायनात" होती है! 

 

ना कभी 'बदले' ये लम्हा... 

ना बदले ये 'ख्वाइश' हमारी... 

हम दोनों ऐसे ही रहें 'एक दूसरे' के... 

जैसे 'तुम चाहत' और मैं 'जिंदगी' तुम्हारी! 

 

ये 'नज़र नज़र' की बात है की किसे क्या 'तलाश' है... 

तू हँसने को 'बेताब' है मुझे तेरी 'मुस्कुराहटों' की 'प्यास' है! 

 

वो "अपनों की दुनिया" में इतना 'खो' गए हैं कि... 

'भूल' गए है कि "वो" भी 'किसी की दुनिया' है! 

 

यूँ तो 'शिकायतें' "तुझसे" 'सैंकड़ों' हैं... 

मगर "तेरी" एक 'मुस्कान' ही काफी है "सुलह" के लिये!  

 

ये 'नजर - नजर' की बात है कि... 

किसे क्या 'तलाश' है तू 'हँसने' को बेताब है... 

मुझे तेरी 'मुस्कुराहटों' की 'प्यास" है! 

 

मेरी 'आँखों' में 'झाँकने' से पहले... 

जरा 'सोच' लीजिये ऐ हुजूर... 

जो हमने 'पलकें झुका' ली तो "कयामत" होगी... 

और हमने 'नजरें मिला' ली तो "मोहब्बत" होगी! 

 

लिख दूं वो 'अल्फ़ाज़' हो तुम... 

सोच लूं वो 'ख्याल' हो तुम... 

मांग लूं वो ही "मन्नत" हो तुम...

और जिसे "जान" से 'ज्यादा चाह' लूं... 

वो "मोहब्बत" हो तुम! 

 

तेरे 'दीदार का नशा' भी "अजीब" है तु 'ना दिखे' तो... 

"दिल" 'तड़पता' है और तु 'दिखे' है तो... 

'नशा और चढता' है! 

 

"इश्क" करने चला है तो कुछ 'अदब' भी "सीख" लेना ऐ दोस्त...

इसमें हंसते हंसते 'साथ' है पर 'रोना' "अकेले" ही पड़ता है!

 

"इनकार" वो करते है 'इकरार' के लिए...

"नफरत" भी करते है तो "प्यार"के लिए...

उलटे ही चलते है यह "इश्क़" के 'कारवां'... 

आँखों को 'बंद' करते है "दीदार" के लिए!

 

छुपा लो तुम 'मुझे' अपनी 'सांसों' के "दरमियां"...

अगर कोई पूछे तो 'कह' देना "ज़िन्दगी" है मेरी!

 

"होठों" पे वही "ख़्वाहिशें"...

आँखों में "हसीन" 'अफ़साने' हैं...

तू अब भी एक 'मदहोश' "गज़ल"... 

हम अब भी "तेरे" 'दीवाने' हैं!

 

हजारों 'अश्क" 'मेरी आँखों' की "हिरासत" में थे… 

तेरा "पैगाम" आया और इन्हे 'जमानत' मिल गई!

 

"गुनाह" 'आँखों' ने किया... 

"गिरफ्तार" 'दिल' हो गया! 

 

मेरी "मोहब्बत" ही देखनी है तो 'गले लगाकर' देखो... 

अगर "धड़कन" ना रूक गयी तो "मोहब्बत" 'ठुकरा' देना! 

 

"तबाह" हो के भी "तबाही" दिखती नहीं... 

ये "इश्क" है "हुजूर" इसकी 'दवाई' मिलती नहीं! 

 

"इजहारे इश्क" किसे कहते हैं मुझे नही पता बस थोड़ी... 

"शिद्दत" से 'पढ़ा' करो मेरी तो हर "शायरी" तुम्हे 'Proроse' करती है! 

 

एक 'अरसे' के बाद ''हमें'' कोई ''चाहने'' लगा है... 

जो "हमारी" 'बातों' पर 'मुस्कराने' लगा है! 

 

कोई "मुराद" और ना बाक़ी रही अपनी... 

बड़ी 'मन्नतों' के बाद 'तुझे' "पाया" हमने! 

 

ना "दुआ" माँगी ना कोई 'गुज़ारिश' की…

ना कोई "फरियाद" ना कोई 'नुमाइश' की…

जब भी 'झुका सर' “खुदा” के आगे...

हमने 'ऐ जान' बस "आपकी" 'खुशी' की "ख्वाहिश" की! 

 

किस तरह से हम 'आपको' "दुआ" दें...

जो 'आपके चहेरे' पे "मुस्कान" खिला दे...

बस एक ही "दुआ" है हमारी उस "रब" से... 

कि 'तारों की रोशनी' से वो आपकी "किस्मत" 'सजा' दे! 

 

तुझे 'कोई 'और भी 'चाहे' इस बात से 'दिल' थोड़ा 'जलता' है...

पर 'फक्र' है मुझे इस बात पर कि...

हर 'कोई' "मेरी पसंद" पर ही 'मरता' है!