Friendship Shayari in Hindi

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Friendship Shayari in Hindi

Friendship Shayari in Hindi

 

"शतरंज" का 'शौकीन' नहीं था इसलिए 'धोखा' खा गया...  

वो 'मोहरे' चल रहे थे मैं 'दोस्ती' "समझ" रहा था! 

 

कुछ सालों बाद नाजाने क्या समां होगा... 

नाजाने कौन दोस्त कहाँ होगा... 

फिर मिलना हुआ तो मिलेंगे यादों में... 

जैसे सूखे गुलाब मिलते हैं किताबों में! 

 

अच्छा दोस्त तकिये के जैसा होता है...  

मुश्किल में सीने से लगा सकते हैं... 

दुःख में उसपे रो सकते हैं...

खुशी में गले लगा सकते हैं और... 

गुस्से में लात भी मार सकते हैं! 

 

आप जैसा दोस्त हर एक का ख्वाब होता है...

जिंदगी में जिनका एक अलग अंदाज़ होता है... 

माना कि आसमा पे लाखो है तारे मगर...  

आप सा दोस्त तारों में भी आफताब होता है! 

 

आपकी दोस्ती की एक नज़र चाहिए...   

दिल है बेघर उसे एक घर चाहिए... 

बस यूँही साथ चलते रहो ऐ दोस्त... 

यह दोस्ती हमें उम्र भर चाहिए! 

 

किस "हद" तक जाना है ये कौन जानता है... 

किस "मंजिल" को पाना है ये कौन जानता है... 

"दोस्ती" के दो पल जी भर के जी लो...  

किस रोज़ "बिछङ" जाना है ये कौन जानता है! 

 

"दोस्ती" के 'मायने' कभी "खुदा" से 'कम' नहीं होते...  

अगर "खुदा" 'करिश्मा' है तो... 

दोस्त भी "जन्नत" से 'कम' नहीं होते हैं! 

 

तेरी दोस्ती ने दिया सूकुन इतना... 

की तेरे बाद कोई अच्छा न लगे... 

तुझे करनी है बेवफ़ाई तो इस अदा से कर... 

कि तेरे बाद कोई भी बेवफ़ा न लगे! 

 

दोस्ती हर चहरे की मीठी मुस्कान होती है... 

दोस्ती ही सुख दुख की पहचान होती है...

रूठ भी गऐ हम तो दिल पर मत लेना...

क्योकि दोस्ती जरा सी नादान होती है! 

 

नादान से भी दोस्ती कीजिए ज़नाब... 

क्योंकि...

मुसीबत के वक़्त कोई भी समझदार साथ नहीं देता! 

 

उसके साथ रहते रहते हमे चाहत सी हो गयी... 

उससे बात करते करते हमे आदत सी हो गयी...

एक पल भी न मिले तो न जाने बेचैनी सी रहती है...

दोस्ती निभाते निभाते हमे मोहब्बत सी हो गयी! 

 

इश्क ओर दोस्ती मेरे दो जहान हैं... 

इश्क मेरी रुह तो दोस्ती मेरा ईमान है...

इश्क पर तो फिदा कर दूँ अपनी पुरी जिंदगी...

पर दोस्ती पर मेरा इश्क भी कुर्बान है!  

 

तुझे चाहा बहुत पर हक नहीं जताया कभी...

दोस्ती का रिश्ता भी ना खो दूं कहीं...

इसलिए सब कुछ छुपाया मैंने! 

 

अपनी मुलाकात कुछ अधूरी सी लगी...

पास होकर भी दुरी सी लगी...

होठों पे हंसी आँखों में मज़बूरी सी लगी...

जिंदगी में पहली बार...

किसी की दोस्ती जरुरी सी लगी! 

 

सच्ची है मेरी दोस्ती आजमा के देखलो... 

करके यकी मुझ पे मेरे पास आके देखलो...

बदलता नहीं कभी सोना अपना रंग...

जितनी बार दिल करे आग लगा कर देखलो! 

 

अपनी 'जिंदगी' के अलग 'उसूल' है...  

"दोस्ती" की खातिर तो 'कांटे' भी "कबूल" है...

हंस कर चल दूं 'कांच के टुकड़ों पर भी...

अगर "यार" कहे, यह 'मेरे बिछाए हुए फूल' हैं! 

 

"दोस्ती" मिसाल बनाएंगे हम "आँखे" बंद करोगी तो...

'सपने' में आएंगे हम भर देंगे इतना 'विश्वास'...

आपके 'दिल' में कि हर "दोस्त" से पहले याद आयेंगे हम! 

 

वो ''दोस्त" मेरी नजर में बहुत ''मायने" रखते है...

जो 'सही वक्त' पर मेरे सामने ''आईने'' रखते हैं! 

 

एक चिंगारी 'अंगार' से कम नहीं होती...

सादगी 'श्रृंगार' से कम नहीं होती...

ये तो अपनी-अपनी 'सोच' का फर्क है...

वरना "दोस्ती" भी 'किसी प्यार' से कम नहीं होती! 

 

तन्हाई सी थी 'दुनिया' की 'भीड़' में...

सोचा कोई 'अपना' नहीं "तकदीर" में...

एक दिन जब "दोस्ती" की 'आपसे' तो यूँ लगा...

कुछ ख़ास था 'मेरे हाथ' की "लकीर" में! 

 

"मुस्कराहट" का कोई 'मोल' नहीं होता...

कुछ "रिश्तों" का कोई 'तोल' नहीं होता...

लोग तो 'मिल' जाते है 'हर मोड़' पर...

हर कोई "आपकी" तरह 'अनमोल' नहीं होता! 

 

"मुस्कुराना" ही 'ख़ुशी' नहीं होती...

"उम्र बिताना" ही 'ज़िन्दगी' नहीं होती...

"दोस्त" को रोज 'याद' करना पड़ता है...

"दोस्ती" कर लेना हीं "दोस्ती" नहीं होती! 

 

तूफ़ान है 'जिंदगी' तो 'साहिल' है 'तेरी दोस्ती'...

सफ़र है मेरी 'जिंदगी' तो 'मंजिल' है 'तेरी दोस्ती'...

'मौत' के बाद मिल जायेगी 'मुझे जन्नत'...

'जिंदगी' भर रहे अगर कायम 'तेरी दोस्ती'! 

 

मैंने 'भूल' शायद 'बहुत बड़ी' कर ली...

मेरे 'दिल' ने दुनिया से "दोस्ती" कर ली! 

 

'दोस्ती नज़रों' से हो तो उसे "कुदरत" कहते हैं...

'सितारों' से हो तो उसे "जन्नत" कहते हैं...

'हुस्न' से हो तो उसे "मोहब्बत" कहते हैं...

और 'दोस्ती आप' जैसे 'दोस्त' से हो तो उसे 'किस्मत' कहते हैं! 

 

एक 'अकेले' से ये 'रस्म अदा' नहीं होती...

दोस्ती की 'शुरुआत' ही "दो" से होती है! 

 

चार दोस्त 'दो साइकिलें' खाली 'जेब' और 'पूरा शहर'...

एक 'खूबसूरत' दौर ये भी था 'जिंदगी' का! 

 

"दोस्ती" के 'मायने' कभी "खुदा" से 'कम' नहीं होते...

अगर "खुदा" 'करिश्मा' है तो...

दोस्त भी "जन्नत" से 'कम' नहीं होते हैं! 

 

वक्त के 'पन्ने पलटकर' देख ऐ ग़ालिब...

फ़िर वो 'हसीन' लम्हे जीने को 'दिल' चाहता है...

कभी 'मुस्कुराते' थे 'सभी दोस्त' मिलकर...

अब उन्हें 'साथ देखने' को 'दिल तरस' जाता है! 

 

दोस्ती से बड़ी कोई "जागीर" नहीं होती...

इससे अच्छी कोई "तस्वीर" नहीं होती... 

एक "प्यार" का "नाज़ुक सा धागा" है दोस्ती...

फिर भी इससे "पक्की" कोई "ज़ंजीर" नहीं होती! 

 

लोग 'रूप' देखते हैं हम 'दिल' देखते हैं...

लोग 'सपने' देखते हैं हम 'हक़ीकत' देखते हैं...

लोग 'दुनिया' में 'दोस्त' देखते हैं...

हम 'दोस्तों' में दुनिया देखते हैं! 

 

'फूल' हो तुम "मुरझाना" नहीं...

अपने इस "दोस्त" को कभी 'भुलाना' नहीं...

जब तक हम 'जिन्दा' है "दोस्त"...

कभी किसी से "घबराना" नहीं! 

 

कहते हैं "हर बात" किसी को कही नहीं जाती...

अपनो को भी "बताई नहीं" जाती...

पर "दोस्त" तो "दिल का आईना" होता है...

और "आईने" से "सूरत छुपाई" नहीं जाती! 

 

कुछ "रिश्तों की चमक" नहीं जाती...

कुछ "यादों की कसक" नहीं जाती...

कुछ "दोस्तों" से होता है ऐसा रिश्ता...

के "दूर रहकर" भी उनकी "महक" नहीं जाती!  

 

दोस्ती मिसाल बनाएंगे हम आँखे बंद करोगी तो...

सपने मे आएंगे हम भर देंगे इतना विश्वास...

आपके दिल मे की हर दोस्त से पहले याद आएंगे हम! 

 

'किस्मत' वालों को ही मिलती है ...

पनाह दोस्तों के दिल में ...

यूँ ही हर शख्स ...

'जन्नत' का 'हक़दार' नहीं होता है! 

 

तु कितनी भी खुबसुरत क्यूँ ना हो ए ज़िन्दगी ...

खुशमिजाज़ दोस्तों के बगैर तु अच्छी नहीं लगती! 

 

दोस्ती वो नहीं जो 'जान' देती है ...

दोस्ती वो भी नहीं जो 'मुस्कान' देती है ...

अरे 'सच्ची दोस्ती' तो वो है जो ...

'पानी में गिरा' हुआ 'आंसू' भी 'पहचान' लेती है! 

 

करूँ क्यों फ़िक्र कि ...

मौत के बाद जगह कहाँ मिलेगी ...

जहाँ होगी 'महफिल मेरे यारों' की ...

मेरी रूह वहाँ मिलेगी! 

 

दोस्त उसे कहते हैं ...

जिसके पास 'तराजू ना' हो! 

 

छोटे से दिल में गम बहुत है ...

जिन्दगी में मिले जख्म बहुत हैं ...

मार ही डालती कब की ये दुनियाँ हमें ...

कम्बखत दोस्तों की दुआओं में दम बहुत है! 

 

मैं फिर से निकलूंगा तलाश - ए -जिन्दगी में ...

दुआ करना दोस्तों इस बार किसी से इश्क ना हो! 

 

जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि ...

एक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले! 

 

न रिश्ता इसका खून से है ...

न ही रिश्ता ये कोई परिवार का है ...

ये दोस्ती एक ऐसा एहसास है ...

जो लगता हैं कि जन्मो जन्मो से साथ है! 

 

आशिकी तेरे बस की बात नही हैं दोस्त ...

तू बंदगी से गुजर बसर कर ले ... 

 

एक शायर ने क्या खूब कहा है दोस्तों ...

जिंदगी निकाल दी जिंदगी को सजाने में! 

 

दिल मे एक शोर सा हो रहा है ...

बिन आप के दिल बोर हो रहा है ...

बहुत कम याद करते हो आप हमे ...

कही ऐसा तो नही की …

ये दोस्ती का रिस्ता कमजोर हो रहा है! 

 

जरा आराम से धड़क इतनी भी क्या जल्दी है ऐ दिल...

तेरी रगों में मेरा यार भी बसता है ...

उसे कोई तकलीफ न हो! 

 

भले ही आप 'शेर' क्यों न हो ...

फिर भी 'जीवन मे दोस्त' होना जरूरी है! 

 

दोस्ती किससे कब हो जाये अंदाज़ा नहीं होता ...

ये वो घर है जिसका कोई दरवाज़ा नहीं होताl 

 

कुछ अलग ही करना है तो वफ़ा करो ए दोस्त ...

वरना मज़बूरी का नाम लेकर बेवफाई तो सभी करते ही हैl 

 

भरोसा रखो हमारी दोस्ती पर ...

हम किसी का दिल दुखाया नही करते ...

आप और आपका अंदाज़ हमे अच्छा लगा ...

वरना हम किसी को दोस्त बनाया नही करते! 

 

खता मत 'गिन दोस्ती' में...

कि किसने क्या 'गुनाह' किया...

दोस्ती तो एक 'नशा' है...

जो तूने भी किया और मैंने भी किया! 

 

छोटा बनके रहोगे तो...

मिलेगी हर बड़ी 'रहमत' दोस्तों...

बड़ा होने पर तो 'माँ' भी...

'गोद' से उतार देती है! 

 

दोस्ती तो जिंदगी का एक खुबसूरत लम्हा है...

जिसका अंदाज सब रिश्तो से अलबेला है...

जिसे मिल जाए वो तन्हाई मे भी खुश है...

और जिसे ना मिले वो भीड मे भी अकेला है! 

 

न रिश्ता इसका खून से है ...

न ही ये रिश्ता कोई परिवार का है ...

ये दोस्ती एक ऐसा एहसास है जो लगता है ...

कि जन्मों जन्मों से साथ हैl 

 

सूरज वो जो दिन भर आसमान का साथ दे ...

चाँद वो जो रात भर तारों का साथ दे ...

प्यार वो जो ज़िंदगी भर साथ दे ...

और दोस्ती वो जो पल पल साथ देl 

 

रिश्तों की यह दुनिया है निराली ...

सब रिश्तों से प्यारी है दोस्ती तुम्हारी ...

मंज़ूर है आँसू भी आखो में हमारी ...

अगर आजाये मुस्कान होंठ पे तुम्हारी! 

 

कैसे कटेगा दोस्त मोहब्बत का ये सफर ...

तुमनें तो बात - बात पर तकिये भिगो लिए! 

 

ये मेरा नाज़ुक सा दिल है इसे कभी मत तोड़ना...

किसी भी बात पर हमसे कभी न मुँह मोड़ना...

हम ज़रा नादान है हमारी थोड़ी सी परवाह करना...

और ये दोस्ती कभी भी हमसे मत तोड़ना! 

 

अगर दोस्ती में कोई गलती हो जाये उसे जरूर सुधार लेना...

मगर अपनी दोस्ती को कभी खोने नही देना...

और अगर दोस्त हो सबसे ज़्यादा प्यारा...

तो उसे चैन की नींद सोने नही देना! 

 

ज़िन्दगी कभी 'धुप' तो कभी 'छांव' है...

हमारे होठों पर बस आपका ही नाम है...

मेरे दोस्त हमसे कुछ मांग कर तो देखो...

मेरे हाथो पर मेरी जान हैl 

 

जिगरी दोस्ती वो थी …

जब मेरे दोस्त ने मुझे गले लगा कर कहा था कि ...

दौलत भी है... शौहरत भी है... और इज़्ज़त भी है ...

पर तेरे बिना ये सब बेकार है! 

 

कोई दौलत पर नाज़ करते हैं...

कोई शोहरत पर नाज़ करते हैं...

जिसके साथ आप जैसा दोस्त हो...

वो अपनी किस्मत पर नाज़ करते हैंl  

 

प्यार करोगे तो परेशान रहोगे शादी करोगे...

तो उदास रहोगे...

लव करोगे देवदास रहोगे...

और हमसे दोस्ती करोगे तो बिंदास रहोगे! 

 

कौन कहता है की यारी बर्बाद करती है, अरे ओ यारों ...

कोई निभाने वाला हो तो दुनिया याद करती हैl 

 

क्या दुआ करू मैं अपने दोस्तों के लिए...

ऐ ख़ुदा बस यही दुआ है कि...

मेरे दोस्त कभी किसी दुआ के मोहताज न होl 

 

दोस्ती का शुक्रिया कुछ इस तरह अदा करूँ...

आप भूल भी जाओ तो मे हर पल याद करूँ...

खुदा ने बस इतना सिखाया हे मुझे...

कि खुद से पहले आपके लिए दुआ करू! 

 

पानी में तैरना सीख लीजिए मेरे दोस्तों...

आंखों में डूबने का अंजाम बुरा होता है!

 

ऐ दोस्त... तू मुझे गुनहगार साबित करने की ज़हमत ना उठा ...

बस ये बता... क्या-क्या कुबूल करना है ...

जिससे दोस्ती बनी रहे!

 

आंखे जो पढ़ ले, उसी को दोस्त मानना साहिब ...

वरना... चेहरा तो रोज दुशमन भी देखते हैं! 

 

"साथ" दो हमारा "जीना" हम सिखायेंगे...

मंजिल" तुम पाओ "रास्ता" हम बनाएंगे...

"खुश" तुम रहो "खुशियां" हम दिलाएंगे...

तुम बस "दोस्त" बने रहो दोस्ती हम निभायेंगे! 

 

वक्त बदल जाता है जिंदगी के साथ ...

जिंदगी बदल जाती है वक्त के साथ!

वक्त नहीं बदलता दोस्तों के साथ ...

बस दोस्त बदल जाते हैं वक्त के साथl 

 

दोस्ती कभी स्पेशल लोगो से नही होती...

जिनसे दोस्ती हो जाती है वह लोग ही स्पेशल हो जाते हैl 

 

लिखकर लाया था 'कोरे कागज' पर परेशानियां...

दोस्तों ने 'पतंग' बनाकर 'उड़ाना' सिखा दियाl 

 

तू जो साथ है मेरे दोस्त तो फिर क्या कमी है...

तेरा साथ होने से ये जहां मेरा, मेरी ये जमीं हैl   

 

लोग रूप देखते है ,हम दिल देखते है...

लोग सपने देखते है हम हक़ीकत देखते है...

लोग दुनिया मे दोस्त देखते है...

हम दोस्तो मे दुनिया देखते हैl 

 

जिनके होने से मैं खुद को मुकम्मल​ मानता हूँ...

मेरे रब के बाद...

मैं बस अपने माँ बाप और दोस्तों को जानता हूँl 

 

खता मत गिन दोस्ती में...

कि किसने क्या गुनाह किया...

दोस्ती तो एक नशा है, जो तूने भी किया और मैंने भी कियाl 

 

ऐ दोस्त... तू मुझे गुनहगार साबित करने की ज़हमत ना उठा...

बस ये बता...

क्या-क्या कुबूल करना है...

जिससे दोस्ती बनी रहेl 

 

शायर कह कर मुझे बदनाम ना करना दोस्तो...

में तो रोज़ शाम को दिन भर का हिसाब लिखता हूँl 

 

मोहब्बत करने वालों को वक़्त कहाँ जो 'गम' लिखेंगे...

ए-दोस्तों... 'कलम' इधर लाओ इन 'बेवफ़ाओं के बारे' में हम लिखेंगेl 

 

कुछ दोस्त सीधे सादे भी अच्छे नहीं लगते...

और कुछ कमीने जान से भी प्यारे होते हैl 

 

अगर आपकी नियत अच्छी होगी...

तो नसीब कभी बुरा नहीं होता है मेरे दोस्तोंl 

 

मुझे मालूम है कि वो रास्ते ...

कभी मेरी मंजिल तक नहीं जाते हैं ...

फिर भी मैं चलता हूँ क्यूँकि ...

उस राह में कुछ दोस्तों के घर भी आते हैंl 

 

चाँद ने चाँद को याद किया ...

प्यार ने प्यार को याद किया ...

लेकिन हमारे पास ना चाँद है ना प्यार ...

इसलिए हमने चाँद जैसे दोस्त को याद कियाl 

 

दोस्ती ऐसी होना चाहिए कि ...

कभी अकेले निकलो तो ...

देखने वाले के दिल में सवाल उठे कि ...

"दूसरा" कहाँ है? 

 

सबकी जिंदगी में खुशियाँ देने वाले दोस्त...

तेरी जिंदगी में कोई गम ना हो...

तुझे तब भी दोस्त मिलते रहें अच्छे अच्छे...

जब इस दुनिया में हम ना होl 

 

कभी-कभी दोस्तों यूँ भी कर लिया करो ...

छोड़कर हमारी शायरी ...

हमारा दिल भी पढ़ लिया करोl 

 

हकीकत 'मोहब्बत की जुदाई' होती है ...

कभी कभी 'प्यार में बेवफाई' होती है ...

हमारे तरफ 'हाथ बढ़ाकर' तो देखो ...

पता चलेगा के 'दोस्ती में कितनी सच्चाई' होती है! 

 

मौत मांगते हैं तो जिन्दगी खफा हो जाती है ...

जहर लेते हैं तो वो भी 'दवा' हो जाती है ...

तू ही बता... 'ऐ दोस्त' क्या करूं ...

जिसे भी चाहा वो 'बेवफा' हो जाती हैl 

 

दोस्ती रूह में उतरा हुआ रिश्ता है साहब...

मुलाकातें कम होने से दोस्ती कम नहीं होतीl 

 

क्युँ मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त...

क्युँ गम को बांट लेते है दोस्त...

ना रिश्ता खून का ना रिवाज से बंधा...

फिर भी जिन्दगी भर साथ देते हैं दोस्तl 

 

दोस्ती रूह में उतरा हुआ रिश्ता है साहब ...

मुलाकातें कम होने से दोस्ती कम नहीं होती! 

 

तू जो साथ है मेरे दोस्त तो फिर क्या कमी है...

तेरा साथ होने से ये जहां मेरा मेरी ये जमीं हैl 

 

काटों में रह कर भी हम 'ज़िन्दगी जी' लेते हैं...

हर 'जख्म' को अपने 'हाथों से सी' लेते हैं...

जिस दोस्त को कह दिया दोस्त का हाथ...

हम उस हाथ से 'ज़हर भी पी' लेते हैं!