Best Whatsapp Status Ever

Home » Whatsapp Status » Best Whatsapp Status Ever

Best Whatsapp Status Ever

Best Whatsapp Status Ever  

 

किस्मत थी मेरी या साजिश थी जमाने कि... 

दूर हुई मुझसे इतना जितनी उम्मीद थी करीब आने की! 

 

वो चल न सके हमारे साथ वरना... 

हमें तो जान देने से भी इनकार न था! 

 

लाख ये चाहा किउसे भूल जाये पर... 

हौसले अपनी जगह बेबसी अपनी जगह! 

 

शायद मेरी जिंदगी से बहुत प्यार था... 

उन्हे इसी लिए मुझे जिंदा ही मार गये! 

 

नजरों को तेरी मोहब्बत से इंकार नहीं है... 

अब मुझे किसी का इंतजार नहीं है... 

खामोश अगर हुँ ये अंदाज है मेरा...

मगर तुम ये ना समझना की मुझे प्यार नही है! 

 

टूटे हुए सपनो और छुटे हुए अपनों ने मार दिया... 

वरना ख़ुशी खुद हमसे मुस्कुराना सिखने आया करती थी! 

 

बहुत मजबूर हो जाता है इंसान... 

जब वो किसी का हो भी नहीं सकता... 

और उसे खो भी नहीं सकता! 

 

मेरी धड़कन की आवाज़ सुननी हो तो...  

मेरे सीने पर अपना सर रख... 

वादा है मेरा ज़िन्दगी भर तेरे कानों में... 

मेरी मोहब्बत गूंजेगी! 

 

तुझे दिल से जुदा कभी होने नहीं देंगे... 

तुझे नींद भी आये तो सोने नहीं देंगे... 

तेरा चेहरा हमें इतना प्यारा है कि... 

हम मर भी गये तो तुझे रोने नहीं देंगे!  

 

गुस्से मे छिपा तेरा प्यार नजर आ गया... 

तभी तो तेरे जाने के कहने पर भी हम रूक गये! 

 

न बोलूँ न लिखूँ तो ये मत समझना कि भूल गए हम... 

खामोशियों ने भी कुछ जिम्मेदारी ले रखी है! 

 

खर्च कर दिया है खुद को पूरा तुम पर... 

और तुम अब भी कहते हो की हिसाब अधूरा है! 

 

जिंदगी बड़ी अजीब सी हो गयी है जो मुसाफिर थे... 

वो रास नहीं आये, जिन्हें चाहा वो साथ नहीं आये! 

 

आँखों के इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया... 

चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया... 

दिन की वो महफिलें गईं रातों के रतजगे गए... 

कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया! 

 

बड़ी मुश्किल में हूँ कैसे इज़हार करुँ... 

वो तो खुशबू है कैसे गिरफ्तार करुँ... 

उसकी मोहब्बत में मेरा हक नही लेकिन... 

दिल करता है की आखरी साँस तक उसका इन्तजार करुँ! 

 

कर लेता हूँ बर्दाश्त हर दर्द इसी आस के साथ कि... 

खुदा नूर भी बरसाता है आज़माइशों के बाद! 

 

वो भी क्या ज़िद्द थी जो तेरे-मेरे बीच एक हद थी... 

मुलाकात मुकम्मल ना सही मुहब्बत बेहद थी! 

 

तुझे फुर्सत कहाँ है चाहत वालो से बात करने की...  

वो हम है जो हर रात तेरी खैरियत की दुआ माँग के सोते हैं! 

 

बस साल ही बदला है मसला वही पुराना है...  

हम पहले भी तेरे दिवाने थे आज भी तेरे दिवाने हैं! 

 

यहाँ कुछ लोग फीलिंग में आकर शायरी लिखते हैं... 

और कुछ लोग उन शायरियो में अपनी फीलिंग ढूढ़ते हैं! 

 

हमारे दुश्मनों को हमारे सामने सर उठाने की हिम्मत नहीं... 

और वो पगली दिल से खेल कर चली गई! 

 

खाली पलके झुका देने से नींद नही आती है जनाब…  

सोते वो लोग है जिनके पास किसी की यादें नहीं होती! 

 

कितना भी खुश रहने की कोशिश कर लो... 

जब कोई बेहद याद आता है तो सच मे बहुत रुलाता है! 

 

नादान से भी दोस्ती कीजिए ज़नाब... 

क्योंकि... 

मुसीबत के वक़्त कोई भी समझदार साथ नही देता! 

 

हमने खुशियोँ की पुरी तिजोरी उनके हवाले कर दी थी... 

लेकिन कमबख्त को सिर्फ मेरी हंसी ही चुरानी थी! 

 

हुस्न का तीर है जरा संभल के रहिएगा...

नजर नजर को मारेगी कातिल हमें ना कहियेगा! 

 

बहुत जल्दी सीख लेते है जिंदगी के सबक... 

गरीब के बच्चे बात बात पर जिद नहीं करते!

 

लिखना था कि खुश हैं तेरे बगैर भी यहां हम... 

मगर कमबख्त... 

आंसू हैं कि कलम से पहले ही चल दिए! 

 

तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो... 

दिल मेरा था और धड़क रहा था वो... 

प्यार का ताल्लुक भी अजीब होता है... 

आंसू मेरे थे और सिसक रहा था वो! 

 

अब जानेमन तू तो नहीं... 

शिकवा - ए - गम किससे कहें... 

या चुप हें या रो पड़ें... 

किस्सा-ए-गम किससे कहें! 

 

कर दो तब्दील अदालतों को मैखानों में... 

सुना है नशे में कोई झूठ नहीं बोलता! 

 

मंज़िलें तो मिली नहीं चलो रास्ते बदल लेते हैं… 

वक़्त तो बदला नहीं चलो ख्वाहिशें बदल लेते हैं! 

 

बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… 

वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी! 

 

मेरी रूह की हक़ीक़त मेरे आँसुओं से पूछ...

मेरा मजलिसी तबस्सूम मेरा तर्जमा नहीं हैं! 

 

रोकने की कोशिश तो बहुत की पलकों ने, मगर... 

इश्क में पागल थे आँसू ख़ुदकुशी करते चले गये! 

 

कहानी खत्म हुई और ऐसे खत्म हुई...

कि लोग रो पड़े तालियाँ बजाते हुए!

 

जरूरी तो नही तुम मेरी निगाह मे रहो...

बस जहा भी रहो खुदा की पनाह मे रहो! 

 

गुजर जायेगा ये दौर भी...

जरा सा इत्मीनान तो रख... 

जब खुशियाँ ही नहीं ठहरी... 

तो गम की क्या औकात है! 

 

बेचैनियाँ बाजार में नहीं मिला करती यारों... 

बाँटने वाला कोई बहुत नज़दीकी होता है! 

 

जिंदगी इतनी भी दुखी नहीं की मरने को जी चाहे... 

बस कुछ लोग इतने दर्द देते है की जीने को दिल नहीं करता! 

 

अकेले रोना भी क्या खूब कारीगरी है... 

सवाल भी खुद के होते है और जवाब भी खुद के! 

 

बहूत नायाब शख्स थे हम अपनी ज़िन्दगी में... ए दोस्त...

ना जाने किसकी दुआ कबूल हुई और हम मोहब्बत कर बैठे! 

 

कितना "महफूज़" था "गुलाब" "काँटों" की गोद में...

लोगों की "मोहब्बत" में "पत्ता पत्ता" "बिखर" गया! 

 

इंसान सबसे सस्ता मोहब्बत के नाम पर बिकता है... 

और सबसे महँगी उसे मोहब्बत ही पड़ती है! 

 

जारी है मेरी कलम से स्याही का रिसना... 

बस तुम दर्द का सिलसिला बरकरार रखना! 

 

बोझ बन जाऊँगा एक दिन अपने ही दोस्तों पे... 

देखना जब कंधे बदल रहे होंगे वो हर दो कदम के बाद! 

 

खुद से मिलने की भी फुर्सत नही अब मुझे... 

और वो औरो से मिलने का इलज़ाम लगा रही है! 

 

ज़ख़्म देने की आदत नहीं हमको... 

हम तो आज भी वो एहसास रखते हैं... 

बदले बदले से तो आप हैं जनाब... 

जो हमारे अलावा सबको याद रखते हैं! 

 

जब खयाल आया तो खयाल भी उनका आया... 

आँखे बंद कीं तो ख्वाब भी उनका आया... 

सोचा याद कर लें किसी और को... 

मगर होंठ खुले तो नाम भी उनका आया! 

 

अभी कुछ दूरियां तो कुछ फांसले बाकी है... 

पल-पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी है...

हमें यकीन है कि...  

कुछ ढूंढ़ता हुआ वो आयेगा ज़रूर... 

अभी वो हौंसले और वो उम्मीदें बाकी है!

 

अपनी तो जिंदगी की अजब कहानी है...

जिसे हमने चाहा वही हमसे बेगानी है... 

हँसता हूँ दोस्तों को हँसाने के लिए... 

वरना इन आँखों में पानी ही पानी है! 

 

वो क्या समझ पायेंगे प्यार की कशिश…  

जिन्होंने फ़र्क़ ही नहीं समझा पसन्द और प्यार में! 

 

जिस दिन बंद कर ली हमने आंखें... 

कई आँखों से उस दिन आंसु बरसेंगे...

जो कहते हैं के बहुत तंग करते है हम...

वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे!

 

अधूरे से रहते मेरे लफ्ज़ तेरे ज़िक्र के बिना... 

मानो जैसे मेरी हर शायरी की रूह तूम ही हो! 

 

आइना देखा जब तो खुद को तसल्ली हुई... 

खुदगर्जी के ज़माने में भी कोई तो जानता है हमें! 

 

मैं क्यों कहूँ उससे की मुझसे बात करो... 

क्या उसे नहीं मालूम की उसके बिना मेरा दिल नहीं लगता! 

 

ख्वाब आँखों से गए नींद रातों से गई... 

वो गए तो ऐसा लगा की जिन्दगी हाथों से गई!  

 

टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर... 

चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में! 

 

जब - जब लगा कि तेरे लिए ख़ास हूँ मैं... 

तेरी बेरूखी ने समझा दिया कि झूठी आस में हूँ मैं! 

 

हमने खुशियोँ की पुरी तिजोरी उनके हवाले कर दी थी... 

लेकिन कमबख्त को सिर्फ मेरी हंसी ही चुरानी थी!  

 

फूल बनने की खुशी में मुस्कुरायी थी कली... 

क्या खबर थी यह तबस्सुम मौत का पैगाम है!  

 

न जाने करीब आना किसे कहते हैं...  

मुझे तो आपसे दूर जाना ही नहीं आता! 

 

मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गई हूँ ऐ खुदा... 

किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे जो मौत तक वफा करे! 

 

दरिया बन मिलते रहे समंदर के पानी से... 

जज्बात ही खो गयी मचलती रवानी में! 

 

एे खुदा इस दुनिया में एक और भी कमाल कर... 

या इश्क़ को आसान कर या खुदकुशी हलाल कर! 

 

मिलना था इत्तफाक बिछड़ना नसीब था... 

वो इतना दूर हो गया जितना करीब था... 

हम उसको देखने को तरसते ही रह गये... 

जिस शख्स की हथेली पर मेरा नसीब था! 

 

खुद को समेट के खुद में सिमट जाते हैं हम... 

एक याद उसकी आती है फिर से बिखर जाते हैं हम! 

 

काश की खुशियो की दुकान होती... 

उनमे हमारी थोरी पहचान होती...  

सारी खुशियाँ डाल देता तेरी दामन मे चाहे... 

उनकी कीमत हमारी जान क्यो न होती!  

 

ऐ खुदा तूने ये प्यार ही क्यों बनाया... 

जिनके हम थे कभी दिल के करीब इतने...

उसने ही मुझे क्यों इस तरह सताया...

ना उनसे मिलते हम ना प्यार ही होता...

आज रो रहे हैं हम क्यों दिल उनसे लगाया! 

 

खर्च कर दिया है खुद को पूरा तुम पर... 

और तुम अब भी कहते हो की हिसाब अधूरा है! 

 

जिन फूलों को संवारा था हमने अपनी मोहब्बत से... 

हुए खुशबू के काबिल तो बस गैरों के लिए महके! 

 

मैं भी तलाश में हूँ, अब किसी अपने की... 

कोई आप सा तो हो लेकिन किसी और का ना हो! 

 

तेरी नादानी को अब क़बूल कर लूँ... 

चलो आज एक और मैं भूल कर लूँ! 

 

मिलना था इत्तफाक बिछड़ना नसीब था...

वो इतना दूर हो गया जितना करीब था... 

हम उसको देखने को तरसते ही रह गये...

जिस शख्स की हथेली पर मेरा नसीब था... 

 

मैं अपनी शायरी में तुमको उतार लेता हूँ... 

गौर से पढ के इन्हें तुम कभी देखो तो सही!

 

कभी कभी हम दिल के हालात भी लिखते हैं... 

हर वक़्त वाह वाह की ख्वाहिश नहीं होती! 

 

"हर कोई "मुझे" जिंदगी जीने का तरीका" बताता है... 

"उन्हें" कैसे समझाऊँ की "कुछ ख्वाब अधुरे" हैं... 

वरना जीना मुझे भी आता है! 

 

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक... 

जिसको भी पास से देखोगे अकेला होगा! 

 

जिस दिन इस "दिल" मे दर्द "बेहिसाब" होता है... 

"शायरी" के लिए वो दिन "लाजवाब" होता है! 

 

हर किसी के नसीब में कहा लिखी होती हे चाहते... 

कुछ लोग दुनिया में आते हे सिर्फ तन्हाइयों के लिए! 

 

उठती है इबादत की खुश्बू क्यूँ मेरे इश्क से... 

जैसे ही मेरे होंठ यूँ छू लेते हैं तेरे नाम को! 

 

जिंदगी सुन्दर हैं पर जीना नही आता... 

हर चीज मे नशा हैं पर पीना नही आता... 

सब मेरे बगैर जी सकते हैं... 

बस मुझे ही किसी के बीना जीना नही आता! 

 

ज़हर पिलाकर अपने हाथों से कहने लगे वो... 

आओ बाहों में दम तोड़ लेने की हसरत पूरी कर लो! 

 

वह मेरा वेहम था कि वो मेरा हमसफ़र है... 

वह चलता तो मेरे साथ था पर किसी और की तलाश में! 

 

वक़्त ने शिकस्त-ओ-फ़तह का खेल खेला हमसे... 

वरना बे-दहन जुबां को ऐतराज कहाँ गज़ल लिखने से! 

 

कहीं पर गम तो कहीं पर सरगम... 

ये सारे कुदरत के नज़ारे हैं... 

प्यासे तो वो भी रह जाते हैं... 

जिनके घर दरिया किनारे हैं! 

 

दिल लगाओ तो जुदा होने की हिम्मत भी रखना... 

क्योंकि... 

जिंदगी में तकदीर के साथ सौदे नही होते! 

 

बात करने का मजा तो उन लोगों के साथ आता है... 

जिनके साथ बोलने से पहले कुछ सोचना ना पड़े! 

 

ईमानदारी की सारी किताबें कल रद्दी में बेच दी हमने... 

उफ़ सालों-साल में भी इक पन्ना काम नहीं आया! 

 

खर्च कर दिया है खुद को पूरा तुम पर और... 

तुम अब भी कहते हो कि हिसाब अधूरा है! 

 

फूल बनने की खुशी में मुस्कुरायी थी कली... 

क्या खबर थी यह तबस्सुम मौत का पैगाम है! 

 

ख़ुदकुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है... 

इसलिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता हैं! 

 

कितना अजीब शौक पाला है दर्द भरा एहसास लिखने का... 

लिखूं तो लोग परेशान और ना लिखूं तो दिल परेशान!  

 

इन बादलों के पार है इक रूहों का शहर... 

हम मिलेंगे वहाँ मेरा नाम याद रखना! 

 

तुम्हारा मिलना इत्तेफाक नहीं है... 

एक उम्र की तनहाई का मेरा मुआवज़ा हो तुम! 

 

मेहबुब में वफ़ा ढूँढते हो बड़े नासमझ हो... 

शीशी ज़हर की है और उसमें दवा ढूँढते हो... 

लोग पीठ पीछे बहुत बड़बड़ा रहे हैं... 

लगता है हम सही रास्ते पर जा रहे हैं! 

 

ना हम रहे दिल लगाने के काबिल... 

ना दिल रहा गम छुपाने के काबिल... 

लगे उसकी यादों के जो... 

जख्म दिल के ऊपर ना छोड़ा... 

उसने मुस्कराने के काबिल! 

 

नसीब से ज्यादा भरोसा किया था तुम पर...  

पर नसीब इतना नहीं बदला जितना तुम बदल गये!