Best Sad Love Status in Hindi

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Best Sad Love Status in Hindi

Best Sad Love Status in Hindi  

 

ये "मोहब्बत" भी अजीब शब्द है...  

ना हो तो "तरस्ता" है और हो जाए तो "तड़पता" है! 

 

टूटे हुए "दिल" भी "धड़कते" है उम्र भर...  

चाहे किसी की "याद" में या फिर किसी "फ़रियाद" में! 

 

गजब का प्यार था... उसकी "उदास आँखो" में... 

महसूस तक ना होने दिया कि... "वो छोड़ने" वाली है! 

 

मैंने कब कहा... तू मुझे "गुलाब" दे...  

या फिर अपनी... "मोहब्बत से नवाज़" दे... 

आज बहुत उदास है... मन मेरा... 

गैर बनके ही सही... तू बस "मुझे आवाज़" दे! 

 

दुआ मांगी थी "आशियाने" की... 

चल पड़ी "आंधियां ज़माने" की... 

मेरे गम को कोई "समझ ना" पाया... 

मुझे आदत थी "मुस्कराने" की! 

 

कुछ हार गई 'तकदीर' कुछ 'टूट' गये सपने ... 

कुछ गैरों ने किया 'बरबाद' कुछ भूल गये अपने! 

 

जिनकी हंसी "खूबसूरत" होती है ...  

उनके "जख्म" काफी "गहरे" होते है! 

 

मेरे तो "दर्द" भी औरों के 'काम' आते हैं...

मैं 'रो' पडूँ तो कई लोग 'मुस्कराते' हैं! 

 

ये 'शायराना अंदाज' है जनाब ...  

यहाँ 'आग'... 'माचिस' से नहीं 'शायरियों' से लगती है! 

 

उजड़ी हुई 'दुनिया' को तू 'आबाद' न कर ...  

बीते हुए 'लम्हों' को तू 'याद' न कर ... 

एक 'कैद परिंदे' ने ये कहा हम से ... 

मैं भुल चुका हूं 'उड़ना' मुझे 'आजाद' न कर! 

 


गलत फहमी का एक पल इतना 'जहरीला' होता है ... 

जो रिश्ते भले ही 'सौ साल पुराने' हो ... 

एक पल में 'भुला' देता है! 

 

तेरा "नाम" ही ये 'दिल रटता' है ... 

ना जाने तुम पे ये 'दिल क्यूं मरता' है ... 

"नशा" है 'तेरे प्यार' का इतना कि ... 

तेरी ही 'याद' में ये दिन 'कटता' है!  

 

"गुनाह" किये होते तो 'माफ' भी हो जाते...  

"ख़ता" तो मुझसे ये हुई कि उनसे 'इश्क़' हो गया! 

 

डर लगता है किसी को 'अपना' बनाने में... 

डर लगता है कुछ वादे निभाने में... 

"प्यार" तो एक 'पल' में हो जाता है... 

बस 'उम्र' लग जाती है उसे 'भूलाने' में!

 

आज फिर 'मौसम' "नम" हुआ मेरी आँखों की तरह... 

शायद कही 'बादलों' का भी किसी ने "दिल" तोडा है! 

 

बहुत दूर है मेरे 'शहर' से तेरे 'शहर' का किनारा... 

फिर भी हम 'हवा' के हर झोंके से... 

आपका "हाल" पूछते हैं! 

 

"शीशा" तो 'टूटकर'... अपनी 'कशिश' बता देता है...

"दर्द" तो उस "पत्थर" का है... जो 'टुटने' के काबिल भी नही! 

 

कहाँ कोई 'मिला' जिस पर 'दिल' "लुटा" देते ... 

हर एक ने 'धोखा' दिया किस-किस को 'भुला' देते ... 

रखते हैं 'दिल में छुपा' के 'अपना दर्द' करते 'बयान' तो ... 

'महफिल को रुला' देते! 

 

अगर 'खुश' है वो देख कर 'अश्क' मेरी आखों में ... 

'खुदा की कसम' हम 'हंसना छोड़' देंगे ... 

'तड़पते' रहेंगे उन्हें 'देखने' को ... 

पर उनकी तरफ 'पलकें उठाना' छोड़ देंगे! 

 

क्या 'खूब लिहाज' रखा है...  

हम दोनों ने 'मोहब्बत' का... 

जब 'दिल' की बात 'कहनी' हो तो... 

'शायरी-शायरी' खेलते हैं! 

 

तूने 'मुझे छोड' दिया कोई बात नही पर...  

हम 'दुआ' करेगे कि... 

कोई 'तुझे ना छोडे' किसी और के लिये! 

 

शर्तों में कब बांधा है... 

तुम्हे ऐ ज़िंदगी... 

ये उम्मीद के धागे है... 

कभी तुम नही... कभी हम नही! 

 

मुझे तेरे 'काफिले में चलने' का ... 

कोई 'शौक़' तो नहीं ... 

मगर 'तेरे साथ' कोई और चले ... 

मुझे 'अच्छा नहीं' लगता! 

 

कितना 'अजीब' शौक पाला है ... 

'दर्द' भरा एहसास 'लिखने' का ... 

लिखूं तो लोग 'परेशान' और... 

ना लिखूं तो "दिल" 'परेशान'! 

 

इत्तिफ़ाक़ समझो या मेरे 'दर्द' की हकीक़त ... 

आँख जब भी 'नम' हुई वजह "तुम" ही निकले! 

 

भर आई मेरी 'आँखे' जब उसका 'नाम' आया ... 

इश्क़ 'नाकाम सही' फिर भी 'बहुत काम' आया ... 

हमने 'मोहब्बत' में ऐसी भी 'गुज़ारी है कई रातें' ... 

जब तक 'आँसू ना' बहे 'दिल को आराम' ना आया! 

 

आया ही था 'खयाल' कि... आँखें 'छलक' पड़ी ...

आँसू किसी की 'याद' के कितने 'करीब' होते हैं!  

 

वो 'अश्क' बन के मेरी "चश्म-ए-तर" में रहता है ...

अजीब 'शख़्स' है "पानी के घर" में रहता है! 

 

ना जाने आखिर इन 'आँसूओ' पे क्या गुजरी ... 

जो "दिल" से आँख तक आये मगर "बह" ना सके! 

 

टपक पड़ते हैं 'आँसू' जब तुम्हारी "याद" आती है ... 

ये वो 'बरसात' है जिसका कोई "मौसम" नहीं होता! 

 

ना जाने कौन सा 'आँसू' मेरा "राज़" खोल दे ...

हम इस ख़्याल से 'नज़रें' "झुकाए" बैठे हैं! 

 

वहाँ से "पानी" की एक 'बूँद' भी ना निकली ...

तमाम 'उम्र' जिन आँखों को 'झील' "लिखते" रहे! 

 

तू "इश्क" की दूसरी 'निशानी' दे दे मुझको... 

'आँसू' तो रोज गिरकर "सूख" जाते हैंl 

 

कभी 'बरसात का मज़ा' चाहो तो... इन 'आँखों' में आ बैठो...

वो 'बरसों' में कभी 'बरसती' है... ये बरसों से 'बरस' रही है! 

 

दुनिया 'फरेब' करके 'हुनरमंद' हो गयी ...

हम 'ऐतबार' करके 'गुनाहगार' हो गये! 

 

मुनासिब समझो तो "मौत" ही दे दो... ए इश्क... 

'दिल' दिया है, इतना 'दाम' तो बनता है मेरा! 

 

उस वक्त तक रहेगी क़यामत रूकी हुई ...

जब तक रहेगा आपका चेहरा नकाब में! 

 

'किस्मत' वालों को ही मिलती है ... 

पनाह दोस्तों के दिल में! 

यूँ ही हर शख्स... 

'जन्नत' का 'हक़दार' नहीं होता है! 

 

'कहानी खत्म' हुई और ऐसे 'खत्म' हुई कि ... 

लोग 'रो' पड़े 'तालियाँ बजाते' हुए! 

 

'दिल का दर्द' ब्यान करना अगर इतना ही ... 

'आसान' होता तो लोग 'गीतों' का 'सहारा' ना लेते! 

 

बहुत 'दूर-दुर' तक 'घुम' लिया 'ज़िंदगी' में दोस्तों ... 

बस ये 'जानने' के लिए कि "नज़दीक" कौन है! 

 

किसी को 'झूठा' "प्यार" करके उसके... 

'अरमानों' के साथ 'मत' खेलो... 

कभी कभी 'टूटे' हुए 'दिलों' की... 

बद-दुआएं 'जिंदगी' को ले "डूबती" है! 

 

सुना है बहुत 'बारिश' है तुम्हारे शहर में ... 

ज्यादा 'भीगना' मत! 

अगर 'धुल' गयी सारी 'गलतफ़हमियाँ' ... 

तो बहुत 'याद' आएँगे हम! 

 

ये गलत है कहना की 'मोहब्बत' ने हमारा 'दिल तोड़ा' है ... 

हम 'खुद ही टुट' गए किसी से 'महोब्बत' करते-करते!  

 

"मोहब्बत" और 'मौत' की 'पसंद' तो देखिए ... 

'एक' को "दिल" चाहिए और 'दूसरे' को "धड़कन"! 

 

सच्ची 'मोहब्बत में प्यार' मिले ना मिले ... 

लेकिन 'याद' करने के लिए ...

एक 'चेहरा' जरूर मिल जाता है! 

 

तुम्हारे 'ग़लत' कहने से... 

मेरा 'सही ग़लत' नहीं होता... 

काश तुम भी 'सही' होते... 

तो कुछ भी 'गलत' नहीं होता! 

 

टूटे हुए "दिल" में रहने की 'कोशिश' ना कर ऐ अजनबी... 

क्योंकि 'सूखे हुए पेड़' पर तो 'परिन्दे' भी "बसेरा" नहीं करते! 

 

बोला ना की 'तेरे बिना' जी नहीं सकते हम ... 

बस इसी बात का 'फायदा उठाते' हो न तुम!  

 

नाम तो 'काँटों' का ही लगेगा ये सोचकर ... 

कई बार 'फूल' भी चुपचाप "ज़ख्म" दे जाते हैं! 

 

आँखों की गली में कोई "आवारा" सा आँसू ...

पलकों से "तेरे घर का पता" पूछ रहा हैं! 

 

काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था...

खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था...

कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में...

वो नादान बचपन भी कितना प्यारा थाl 

 

बढ़ती जा रही है ... 

दुनिया में 'शायरों'  की तादात ...

वाह... रे "इश्क" ... 

तूने 'किसी' को भी 'नहीं' बख्शा! 

 

"दिल" के बदले 'दर्द' खरीदा 'आग' लगी मेरी चतुराई में...

कितना "सस्ता" बेच दिया 'दिल' को मैंने इस 'महंगाई' में! 

 

वो साथ थे तो एक 'लफ़्ज़' ना निकला 'लबों' से... 

दूर क्या हुए... 'कलम' ने 'क़हर' मचा दिया! 

 

हर किसी का "दिल" टुटा मिला ... 

"इश्क़" और "प्यार"में! 

कोई तो होगा, जो सिर्फ खुश होगा ... 

ऐ "इश्क़" तेरी कतार में!